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    करोड़ों का बजट फिर भी अंधेरे में अस्पताल? बरेली के 300 बेड हॉस्पिटल में जनरेटर तक के पैसे नहीं!

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 06:30 AM (IST)

    बरेली के तीन सौ बेड अस्पताल में बारिश के कारण बिजली गुल हो गई, जिससे पैथोलॉजी और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांचें तीन घंटे तक ठप रहीं। करोड़ों की लाग ...और पढ़ें

    तीन सौ बेड अस्पताल में अंधेरे में काम करती महिला कर्मी। जागरण

    तीन सौ बेड अस्पताल में अंधेरे में काम करती महिला कर्मी। जागरण

    HighLights

    1. पैथोलाजी में जांचों के साथ तीन घंटे तक नहीं हो सकीं सीटी स्कैन की जांचें

    जागरण संवाददाता, बरेली। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार तीन सौ बेड अस्पताल में तीन ओपीडी चलाकर अधिकारियों ने खानापूरी तो कर दी लेकिन अब तक व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। वर्षा की वजह से शुक्रवार को तीन सौ बेड अस्पताल की बत्ती भी गुल हो गई। इसकी वजह से स्टाफ को अंधेरे में काम करना पड़ा।

    अस्पताल की ओपीडी में तो इन्वर्टर की वजह से काम चल गया लेकिन पैथोलाजी जांचों के अलावा सीटी स्कैन की जांचें भी नहीं हो सकीं और मरीजों को इंतजार करना पड़ा। अस्पताल में बजट के अभाव में जनरेटर चलाने का इंतजाम ही नहीं है। ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है लेकिन अस्पताल के पूरी तरह से संचालन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

    तीन सौ बेड अस्पताल को कोरोना काल के दौरान कोविड अस्पताल बनाकर जांचें शुरू करने के साथ मरीजों को भर्ती किया गया। कोरोना के बाद लगभग तीन साल पहले प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से यहां नेत्र, दंत और फिजीशियन की ओपीडी शुरू कर दी गईं।

    इसके बाद यहां सीटी स्कैन और एंटी रैबीज क्लिनिक भी शुरू कर दिया गया लेकिन इसके बाद कोई इंतजाम नहीं किए गए। डाक्टरों और स्टाफ की भर्ती न होने की वजह से न तो कोई ओर ओपीडी संचालित हुई और न ही मरीजों को भर्ती करना शुरू किया गया जबकि यहां सामान भी खराब होने लगा।

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    शुक्रवार सुबह अचानक तेज हवा के साथ वर्षा शुरू हो गई। इसकी वजह से कई इलाकों की बिजली कट गई। खुर्रम गौटिया इलाके की बिजली गुल होने से तीन सौ बेड अस्पताल में भी अंधेरा छा गया। सुबह पौने 11 बजे अस्पताल में अंधेरा छाया हुआ था। यहां पर ओपीडी में डाक्टर मरीज देख रहे थे और इन्वर्टर की रोशनी से काम चला रहे थे।

    नेत्र की ओपीडी में लगी मशीन बिजली जाने की वजह से नहीं चल रही थी, इसकी वजह से कुछ जांचें प्रभावित हुईं। पैथोलाजी में इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए स्टाफ मोबाइल की टार्च से रोशनी कर काम चला रहा था। इसकी वजह से जांचें नहीं हो पा रही थीं।

    इसके अलावा सीटी स्कैन की भी जांचें बिजली न होने से ठप पड़ी थीं। स्टाफ और मरीजों ने बताया कि लगभग दो घंटे से अधिक देर से बिजली गुल है। सीएमओ डा. विश्राम सिंह ने बताया कि अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मानव संसाधन और बजट के अभाव में व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

    जिला अस्पताल में इंटरनेट की खराबी से हाथ से बने पर्चे

    जिला अस्पताल में शुक्रवार को इंटरनेट की खराबी की वजह से हाथ से पर्चे बनाने पड़े। यहां पर दो दिनों से इंटरनेट में खराबी आ रही है। शुक्रवार को टेलीकाम कंपनी के प्रतिनिधि को कमी दूर करने के लिए बुलाया गया।

    वर्षा की वजह से आम दिनों की अपेक्षा आधे से भी कम मरीज पहुंचे, इसलिए पर्चा बनाने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई लेकिन सोमवार के दिन इंटरनेट बाधित हुआ तो मरीजों को परेशानी होगी।

    पेट का सीटी स्कैन कराने आया हूं। दो घंटे से बिजली न होने की वजह से जांच नहीं हो पा रही है। - लेखराज, निघासन खीरी

    बुखार के बाद खून की जांच के लिए डाक्टर ने लिखा है। अस्पताल की दो घंटे से बिजली गुल होने से जांच नहीं हो रही है। - रवि कुमार, सदर बरेली


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