बजट के बाद जगी आस: बरेली के इस आलीशान अस्पताल को मिलने जा रहा है अपना स्टाफ और आधुनिक मशीनें
बरेली में 69 करोड़ की लागत से बना 300 बेड का अस्पताल चार साल बाद भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जुलाई 2022 में हैंडओवर होने के बावजूद यहां केवल ओपीडी ...और पढ़ें

300 बेड अस्पताल
HighLights
69 करोड़ से बने इस अस्पताल में चार साल बाद भी नहीं हो सकी स्टाफ की तैनाती
विकल्प के तौर पर शासन इसे पीपीपी मोड पर भी देने की कर रही तैयार
जागरण संवाददाता, बरेली। प्रदेश का बजट प्रस्तुत होने के बाद मंडल मुख्यालय पर मेडिकल कालेज की संभावना तो नहीं है लेकिन लगभग 69 करोड़ से बने तीन सौ बेड अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल की तरह स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की भी उम्मीद जाग गई है। 16 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल पर बने इस हास्पिटल में चिकित्सकों के साथ अन्य स्टाफ की नियुक्ति अब तक नहीं की जा सकी है।
हालांकि इसे पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर संचालित कराने का भी विकल्प भी तैयार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसका प्रस्ताव भी शासन को भेज चुका है। यह अस्पताल मार्च 2013 में बनना शुरू हुआ था। जुलाई 2022 में स्वास्थ्य विभाग को इसे हैंडओवर भी किया जा चुका है लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि इतने लंबे समय बाद भी यहां किसी चिकित्सक, पैरा मेडिकल सहित दूसरे स्टाफ की तैनाती तो दूर अब तक पदों का सृजन तक नहीं हुआ है।
विभाग की ओर से कई बार स्टाफ को लेकर प्रस्ताव को शासन में भेजा जा चुका है। अभी यहां केवल आंख-दांत के इलाज के लिए ही चिकित्सक बैठ कर रहे हैं, वो भी केवल ओपीडी के लिए ही हैं। जबकि इस अस्पताल को बनाने के लिए शासन की मंशा तो यही थी कि यहां जिला अस्पताल से कहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और भर्ती होने वाले मरीजों के आपरेशन व दूसरी जांचें आधुनिक तरीके से हो सकें।
इस अस्पताल को स्थायी स्टाफ की तैनाती हो सके, इसके लिए नवंबर 2023 में तत्कालीन डीएम ने शासन को स्टाफ स्ट्रक्चर का प्रस्ताव भेजा था। इसमें करीब दो सौ चिकित्सक व कर्मचारियों की जरूरत बताई गई थी लेकिन चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव के पास इसकी फाइल जाने के बाद अब तक डंप पड़ी है।
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इधर, प्रदेश का बजट पेश होने के बाद इस अस्पताल के संचालन की उम्मीद जाग गई है। आइएमए अध्यक्ष डा. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि पीपीपी मोड पर अस्पताल को संचालित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई बार मंथन हो चुका है। सीएमओ डा. विश्राम सिंह ने बताया कि शासन ने हाल में ही तीन सौ बेड अस्पताल को संचालित करने को नए सिरे से सूचनाएं मांगीं थी, जिन्हें भेजा जा चुका है।