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    बरेली महिला अस्पताल में रेड से हड़कंप: CMS समेत डॉक्टर गायब, मरीजों को दी जा रही थी 3 महीने बाद की डेट

    Updated: Mon, 11 May 2026 04:04 PM (GMT+05:30)

    बरेली जिला महिला अस्पताल में औचक निरीक्षण के दौरान सीएमएस समेत कई डॉक्टर और स्टाफ अनुपस्थित मिले। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए तीन माह बाद की तारीखें ...और पढ़ें

    निरीक्षण के दौरान बातचीत करते अधिकारी

    निरीक्षण के दौरान बातचीत करते अधिकारी

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    1. निरीक्षण के दौरान मरीजों ने भी अधिकारियों के सामने रखीं समस्याएं

    जागरण संवाददाता, बरेली। जिला महिला अस्पताल में सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं में कई गंभीर कमियां मिलीं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत डाक्टर और स्टाफ अनुपस्थित मिला।

    अपर जिलाधिकारी प्रशासन पूर्णिमा सिंह के नेतृत्व में उप जिलाधिकारी न्यायिक मीरगंज निधि डोडवाल, अपर उपजिलाधिकारी सदर मल्लिका नैन, जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राना और सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पाण्डेय ने निरीक्षण के दौरान महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. त्रिभुवन प्रसाद अनुपस्थित मिले।

    ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात गायनेकोलॉजिस्ट डाॅ. शमी और डाॅ. मिनाक्षी भी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं। इसके अलावा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के अधिकांश कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए। अल्ट्रासाउंड कक्ष में मरीजों के आवागमन का कोई वैध रजिस्टर नहीं मिला और मौके पर मौजूद अल्ट्रासाउंड नोडल अधिकारी एवं रेडियोलॉजिस्ट सीपी सिंह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

    अधिकारियों ने संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अल्ट्रासाउंड वार्ड में तैनात वार्ड सहायक नीलम यादव के खिलाफ मरीजों से दुर्व्यवहार की कई शिकायतें मिलीं। अधिकारियों ने इस मामले में भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को तीन माह बाद की तारीख दिए जाने का मामला भी सामने आया।

    वहीं हेल्प डेस्क पर शिकायत पंजिका में दर्ज शिकायतों के निस्तारण की स्थिति स्पष्ट नहीं मिली, जिस पर अधिकारियों ने व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार पर न तो स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध मिलीं और न ही वहां कोई वार्ड सहायक या गार्ड मौजूद था।

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    निरीक्षण के दौरान मरीजों ने भी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। एक मरीज तरनीम ने बताया कि उसकी पैथोलॉजी जांच अस्पताल में नहीं की जा रही है और बाहर जांच कराने पर 1700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

    वहीं दूसरी मरीज पूनम शुक्ला ने बताया कि उन्हें प्रोजेस्ट्रोन इंजेक्शन अस्पताल में नहीं मिला, जिसके कारण बाहर से इंजेक्शन लगवाना पड़ा।निरीक्षण टीम ने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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