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    IAS का रौब और लाखों की ठगी: बरेली की 'लेडी नटवरलाल' ने पीलीभीत वालों को भी नहीं छोड़ा, ऐसे फंसाती थी जाल में

    Updated: Sat, 09 May 2026 08:23 PM (IST)

    फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के खिलाफ बरेली में पांच और मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिससे कुल मामलों की संख्या 19 हो गई है। इन नए मामलों में पीलीभी ...और पढ़ें

    श‍िखा पाठक और व‍िप्रा शर्मा

    श‍िखा पाठक और व‍िप्रा शर्मा

    HighLights

    1. पीड़ितों में एक महिला पीलीभीत निवासी, दिया था सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा

    जागरण संवाददाता, बरेली। फर्जी आइएएस विप्रा शर्मा और उसकी बहनों की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह हो चुकी है कि इस गिरोह के शिकार पीड़ित न सिर्फ बरेली से बल्कि आस-पास के जिलों से भी सामने आ रहे हैं। शनिवार को फर्जी आइएएस विप्रा शर्मा व उसकी बहनों के विरुद्ध पांच और प्राथमिकी पंजीकृत की गईं। इस गिरोह के विरुद्ध अब तक कुल 19 प्राथमिकी पंजीकृत हो चुकी हैं। ऐसे में अब जल्दी तीनों को जमानत नहीं मिल सकेगी।

    शनिवार को बारादरी थाने में दर्ज पांच मुकदमों में से पहला मुकदमा पीलीभीत निवासी हिना ने दर्ज कराया है। हिना का कहना है कि विप्रा शर्मा ने उन्हें सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। झांसे में आई हिना से आरोपित विप्रा ने उनसे कुल 1.90 लाख रुपये ले लिए।

    न तो नौकरी लगी और न ही उनके रुपये वापस किए गए। दूसरा मुकदमा फतेहगंज पश्चिमी के फरीदापुर रामचरन निवासी अभिषेक मौर्य ने दर्ज कराया। उन्होंने पुलिस को बताया कि विप्रा शर्मा ने उन्हें सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। कहा कि किसी अच्छी पोस्ट पर उनकी नौकरी बड़ी ही आसानी से लग जाएगी।

    आरोप है कि इसके एवज में विप्रा शर्मा ने अभिषेक से कुल चार लाख रुपये की मांग रखी थी। झांसे में आए अभिषेक ने नौकरी लगने से पहले दो लाख रुपये दे दिए थे। कहा था कि बाकी के दो लाख रुपये वह नौकरी लगने के बाद देंगे। आरोप है कि न तो नौकरी लगी और न ही रुपये वापस हो रहे हैं।

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    तीसरा मुकदमा बारादरी के सिटी हार्ट कालोनी निवासी दिलप्रीत सिंह लिखाई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह एक इंश्योरेंस कंपनी में कार्यरत थे। उस वक्त विप्रा उनके कार्यालय में एक इंश्योरेंस की जानकारी लेने आई थी। आरोप है कि उसी वक्त, उसने कहा था कि वह उनकी सरकारी नौकरी लगवा देगी। बदले में उसने सात लाख रुपये की मांग रखी।

    आरोप है कि, झांसे में आए दिलप्रीत ने शुरूआत में 3.5 लाख रुपये दे दिए। जबकि, आधे रुपये नौकरी लगने के बाद देने की बात हुई। आरोप है कि न तो नौकरी लगी और न ही उनके रुपये वापस हुए। चौथी प्राथमिकी इज्जतनगर निवासी फरहत ने दर्ज कराई है।

    उन्होंने पुलिस को बताया कि, वह भी एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करती है। आरोप है कि विप्रा ने उन्हें भी सरकारी नौकरी का झांसा दिया। कहा कि 11 लाख रुपये में वह उसकी नौकरी लगवा देगी। इसके बाद उसने चार लाख रुपये दे दिए। जब नौकरी नहीं लगी तो उन्होंने अपने रुपये मांगे।

    आरोप है कि आरोपित विप्रा ने टालमटोल शुरू कर दी। इसी तरह से पांचवीं प्राथमिकी भमोरा निवासी अजय ने लिखाई है। उससे भी विप्रा ने छह लाख रुपये नौकरी के नाम पर मांगे, मगर उन्होंने शुरूआत में तीन लाख रुपये ही दिए। सभी मामलों में बारादरी थाने में ही प्राथमिकी लिखी गई है।

    कैसे खुला ठगी का रैकेट

    तीनों बहनों के इस गिरोह से पर्दा तब उठा जब बारादरी थाना क्षेत्र निवासी प्रीति लायल ने इनकी शिकायत पुलिस से की। उन्होंने आरोप लगाया था कि आरोपित विप्रा शर्मा व उसकी बहनों ने उनसे व उनके साथियों से सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर करीब 12 लाख रुपये की ठगी की थी।

    बाद में धीरे-धीरे वह सभी पीड़ित थाने पहुंचने लगे जो इस गिरोह के शिकार हुए थे। पुलिस ने जब इन्हें गिरफ्तार किया तो तीनों बहनों के बैंक खातों में 56 लाख रुपये फ्रीज कराए, 4.50 लाख रुपये कैश बरामद किया। इतना ही नहीं, एक एक्यूवी कार और तमाम फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए। तीनों बहनें अभी भी जेल में हैं।

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