रिश्वत के 60 हजार नहीं दे पाया बेटा, और तड़प-तड़प कर मर गया पिता: बरेली जेल का शर्मनाक वाकया
बरेली जेल के एक कैदी की मेरठ मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर रिश्वत न दे पाने के कारण मौत हो गई। आरोप है कि सिपाहियों ने इलाज के लिए 60 हजार रुपये मांगे ...और पढ़ें

बरेली जिला जेल
HighLights
उपचार के नाम पर मांगी थी 60 हजार रुपये रिश्वत, पड़ा था दिल का दौरा
सिपाहियों ने कहा, एस्टीमेट बनकर आने में होगी देरी, इसलिए देने होंगे रूपये
जागरण संवाददाता, बरेली। रिश्वत के रुपये नहीं दे पाने पर कैदी की मौत हो गई। हार्ट-अटैक आने पर उसे मेरठ मेडिकल कालेज रेफर किया गया। आरोप है कि वहां सिपाहियों ने कैदी के बेटे से कहा कि डाक्टर बिना रुपये उपचार शुरू नहीं करेंगे इसलिए 60 हजार रुपये देने होंगे। परिवार वाले रुपये नहीं दे पाए तो कैदी की मौत हो गई। रिश्वत मांगने का एक आडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
मामले में कैदी की पत्नी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की है। आरोप लगाया है कि रिश्वत के रुपये नहीं दे पाई तो उनके पति की मौत हो गई। उधर, जेल प्रबंधन शिकायत को ही झूठा साबित करने में जुटे हुए हैं। उनका कहना हैं कि फर्जी शिकायत की गई होगी। ऐसी कोई मांग नहीं की गई थी।
फतेहगंज पश्चिमी के मनकरी गांव निवासी सत्यपाल हत्या के मामले में सेंट्रल जेल दो (जिला जेल) में आजीवन सजा काट रहे थे। पिछले वर्ष मार्च में उन्हें सजा सुनाई गई थी। इस वर्ष 21 मार्च को सत्यपाल को दिल का दौरा (हार्टअटैक) पड़ा। जेल से तत्काल उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।
जहां डाक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें मेरठ मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया। वहां जाने के बाद उनकी प्रारंभिक जांच हुई और स्टंट पड़ने के लिए आपरेशन की बात कही गई। आरोप है कि कैदी के साथ गई गााार्ड के एक सिपाही ने सत्यपाल के बेटे आकाश (जो साथ गया था) से कहा कि यहां पर उपचार को उन्हें 60 हजार रुपये देने होंगे।
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तभी आगे का उपचार शुरू होगा। अन्यथा काफी देर हो जाएगी। इस पर आकाश ने अपने गांव के प्रधान से सिपाही की बात कराई तो सिपाही ने उनसे भी यही कहा। प्रधान ने पूछा क्यों तो सिपाही ने कहा कि वैसे तो प्रक्रिया है कि अस्पताल से डाक्टर एस्टीमेट बनाकर देंगे जो जेल जाएगा। वहां से शासन को भेजा जाएगा।
इसके बाद शासन से रुपये आने के बाद अस्पताल को दिए जाएंगे तो उपचार शुरू होगा। इसमें काफी समय लग सकता है। फोन पर सिपाही ने कहा कि यदि अभी 60 हजार रुपये की व्यवस्था कर दें तो उपचार शुरू हो सकता है क्योंकि इमरजेंसी है। बाद में रुपये आने पर वापस कर दिए जाएंगे।
इस पूरी बातचीत की स्वजन के पास काल रिकार्डिंग भी है। कैदी सत्यपाल की पत्नी पुष्पा देवी का आरोप है कि वह रुपये नहीं दे पाई तो उनके पति की 22 मार्च को मौत हो गई। इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। मांग रखी है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या है उपचार का नियम
जेल प्रबंधन से जुड़े लोग बताते हैं कि यदि किसी भी मरीज के उपचार में मोटी रकम खर्च होती हो डाक्टर उसका एस्टीमेट बनाकर देते हैं। उस एस्टीमेट को शासन भेजा जाता है और वहां से रुपये आने के बाद उपचार शुरू होता है।
यह प्रक्रिया तब होती है जब मरीज के पास समय होता है और उसकी जान को खतरा नहीं होता। यदि कोई इमरजेंसी है तो जेल प्रबंधन किसी अन्य मद से उपचार के लिए रुपये दे देता है बाद में उपचार के रुपये आने पर उन्हें एडजस्ट कर देता है। स्वजन से रुपये मांगने का कोई प्रावधान नहीं हैं।
किसी भी तरह की कोई रिश्वत नहीं मांगी गई है। उल्टा कैदी की मृत्यु के बाद जेल प्रबंधन ने ही रुपयों का इंतजाम कर कैदी के शव को उनके घर पहुंचाया है। शिकायत झूठी की गई है।
- शैलेश सिंह, जेलर, सेंट्रल जेल दो
नोट: दैनिक जागरण प्रसारित आडियो की पुष्टि नहीं करता है।