बरेली का वो खौफनाक साल! जब 46,000 लोग हुए थे मलेरिया का शिकार, पूरी दुनिया में मचा था हड़कंप
सात साल पहले बरेली में 46,000 से अधिक मलेरिया के मामले सामने आए थे, जिससे जिले का नाम पूरी दुनिया में चर्चा में आ गया था। अब व्यापक रोकथाम प्रयासों के ...और पढ़ें

विश्व मलेरिया दिवस
HighLights
तीन साल पहले भी मलेरिया ने पकड़ी थी रफ्तार
जागरण संवाददाता, बरेली। सात साल पहले जिले में एक-दो नहीं बल्कि 46 हजार लोगों को मलेरिया का डंक लगा था, तब जिले के साथ प्रदेश, देश और पूरी दुनिया में बरेली का नाम आ गया था। इसके एक साल पहले भी लगभग 37 हजार मरीज मलेरिया के मिले थे। इसके बाद मलेरिया की रोकथाम के व्यापक स्तर पर प्रयास किए गए। तीन-चार पहले भी जिले में मलेरिया ने रफ्तार पकड़ी थी और प्रदेश में खलबली मच गई थी।
इसके बाद से संख्या लगातार घट रही है। इस साल अब तक 17 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई, जिसमें दो बाहर के होने की वजह से संख्या 15 ही रह गई है। इस बार विश्व मलेरिया दिवस की थीम 'मलेरिया को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प अब हम सब करते हैं, अब हमें करना ही होगा' है।
मलेरिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में 37 हजार से अधिक मलेरिया मरीज मिले थे, जिनकी संख्या 2019 में बढ़कर 46 हजार से अधिक हो गई थी। वहीं पिछले चार वर्षों की बात करें तो वर्ष 2023 में 2,490, 2024 में 2,817 और 2025 में 1,938 मरीज मिले थे।
जिले में 84 गांव मलेरिया के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियंत्रण के संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान अधिकारी निरीक्षण भी कर रहे हैं और यदि कोई कमी मिल रही है तो सुधार भी किए जा रहे हैं।
खबरें और भी
जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि जिले में दस्तक अभियान के तहत 11 लाख घरों का भ्रमण आशा कार्यकर्ताओं को करना है, जिसके सापेक्ष अभी 6.70 लाख घरों का भ्रमण किया जा चुका है। अब तक 728 गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है और 116 गांवों में फागिंग कराई जा चुकी है।
अब तक 3300 बुखार के मरीज मिले हैं, जिनकी जांच में मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि शासन से नई दवा भी उपलब्ध कराई गई है। सीएमओ की ओर से सभी अधीक्षकों और प्रभारी अधिकारियों को विश्व मलेरिया दिवस पर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।