बरेली: ओपीडी में मरीजों की भीड़, लेकिन 60 साल पुराने आयुर्वेदिक अस्पताल को नहीं मिल रही 5 एकड़ जमीन
बरेली के राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद नए भवन के लिए पांच एकड़ जमीन नहीं मिल पा रही है। 60 साल पुराने जर्जर भवन और सं ...और पढ़ें

आयुर्वेदिक कालेज अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए लगी लाइन। जागरण
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राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं मेडिकल कालेज में चार सौ तक पहुंच रही ओपीडी
जागरण संवाददाता, बरेली। मरीजों का रुझान आयुर्वेद पर काफी बढ़ा है। इस कारण राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं मेडिकल काॅलेज में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन यहां से इलाज पाना मरीजों के लिए किसी जंग से कम नहीं है। 60 वर्ष से संचालित अस्पताल में जगह नहीं और यहां पहुंचना भी संकरी सड़क की वजह से काफी मुश्किल है।
कई वर्ष से अस्पताल के नए भवन के लिए पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है, लेकिन मिल नहीं पा रही है। सिर्फ फाइल प्रशासन और शासन के बीच घूम रही है। कुछ दिनों पूर्व अस्पताल को यूनानी अस्पताल में शिफ्ट करने की योजना बनी, लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी।
बासमंडी में स्थापित एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल एवं मेडिकल काॅलेज वर्ष 1966 से संचालित हो रहा है। इसका भवन इससे भी पूर्व का बना हुआ है, क्योंकि पहले यहां पर ट्रस्ट की ओर से अस्पताल का संचालन होता था। अस्पताल में 14 विभाग हैं, जिनमें 32 डाॅक्टर और 100 स्टाफ हैं।

यहां पर दो सौ से अधिक बीएएमएस के छात्र अध्ययन कर रहे हैं। अस्पताल में पहले मरीज कम आते थे, लेकिन अब 350 से 400 मरीज पहुंचते हैं। जगह की कमी की वजह से सिर्फ एक पर्चा काउंटर है, जहां लंबी लाइन लगती है। दवा काउंटर पर भी जगह न होने की वजह से मरीजों को परेशानी होती है।
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डाॅक्टरों की ओपीडी कक्ष में भी अधिक मरीज आने पर बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलता है। सबसे बड़ी बात है कि अस्पताल में पहुंचना मुश्किल है। श्यामतगंज और कुतुबखाना के रास्ते अस्पताल में पहुंचा जा सकता है। यह रास्ता काफी संकरा है। बमुश्किल बाइक निकलती है। कार और ई-रिक्शा जाकर फंस जाते हैं।
यही वजह है कि अधिकांश डाक्टर भी बाइक से ही आते हैं और उन्हें छात्रावास में खड़ी करते हैं। अस्पताल में वाहनों की पार्किंग की जगह नहीं है और बाहर खड़े करने पर जाम लगता है। अस्पताल की पहली मंजिल पर कक्षाओं का संचालन होता है। वर्षों पुराना भवन होने की वजह से यह जगह-जगह से जर्जर हो चुका है।
मरम्मत के जरिए काम चलाया जा रहा है। इसी वजह से कई वर्ष से अस्पताल के नए भवन निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। कई बार फाइल विभाग को भेजी गई और वहां से प्रशासन को भेजी गई। एक दो स्थान भी चिह्नित किए गए, लेकिन जमीन नहीं मिल सकी।
कुछ दिनों पहले डीएम की ओर से अस्पताल को यूनानी अस्पताल में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन यूनानी विभाग की आपत्ति के बाद इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्राचार्य डाॅ. प्रीति शर्मा ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। भवन काफी पुराना हो गया है। अस्पताल के नए भवन के लिए पांच एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है।