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फर्जी IAS बहनें जेल में ही रहेंगी! फर्जी अप्वाइंटमेंट लेटर देकर लाखों ऐंठने वाली विप्रा-शिखा की जमानत याचिका खारिज

Published: Thu, 22 Oct 2026 01:12 PM (IST)

खुद को एसडीएम बताकर सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी आईएएस डॉ. विप्रा शर्मा और उसकी बहन ...और पढ़ें

शिखा शर्मा और विप्रा शर्मा

शिखा शर्मा और विप्रा शर्मा

HighLights

  1. एसडीएम बताकर बदायूं के विकास भवन में चपरासी की नौकरी के बहाने की थी ठगी

जागरण संवाददाता, बरेली। खुद को एसडीएम बताकर सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाली मुख्य आरोपित फर्जी आइएएस डाॅ. विप्रा शर्मा और उसकी सह आरोपित बहन शिखा शर्मा की अपर सत्र न्यायाधीश-10 राघवेन्द्र मणि ने जमानत अर्जी खारिज कर दीं।

थाना कोतवाली में रमेश चंद्र ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बीते वर्ष आरोपितों ने उनके बेटे को बदायूं विकास भवन में चपरासी के पद पर दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था।

इसके बदले में दो लाख रुपये नकद के साथ-साथ सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी ले लिए थे। इन्हें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, लखनऊ के नाम से एक कूटरचित और फर्जी नियुक्ति पत्र भी डाक के जरिए भेज दिया था।

जिस पर आयोग के अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर भी अंकित थे। जब उन्हें पता चला कि डाॅ. विप्रा शर्मा कोई असली अधिकारी नहीं बल्कि एक फर्जी एसडीएम है और उनके द्वारा बांटे गए सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं।

तब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगने के लिए आरोपितों से संपर्क किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। सरकारी वकील संतोष श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि मुख्य आरोपित डाॅ. विप्रा शर्मा पर लगभग 20 और शिखा शर्मा पर करीब 14 गंभीर मामले दर्ज पाए गए, जो अधिकतर इसी तरह की धोखाधड़ी से जुड़े हैं। अदालत ने दोनों बहनों की जमानत अर्जी नामंजूर कर दी।

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