बरेली के वनखंडी नाथ मंदिर का पौराणिक महत्व, द्वापर युग में द्रौपदी ने स्थापित किया था शिवलिंग
बरेली का प्राचीन वनखंडी नाथ मंदिर महाभारत काल से जुड़ा है, जहां द्रौपदी ने शिवलिंग की स्थापना की थी। सावन में लाखों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं औ ...और पढ़ें

प्राचीन वनखंडी नाथ मंदिर।
HighLights
वनखंडी नाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है।
द्रौपदी ने द्वापर युग में यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।
मंदिर परिसर में 108 शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर हैं।
जागरण संवाददाता, बरेली। शहर के जोगी नवादा क्षेत्र में स्थित प्राचीन वनखंडी नाथ मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक आस्था के कारण विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। सावन माह में यहां लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं, जबकि सावन के सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। मंदिर परिसर में भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं और सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना का क्रम चल रहा है।
मंदिर का इतिहास
बनखंडी नाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि द्वापर युग में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर के महंत केदारपुरी के अनुसार द्रौपदी के पिता राजा द्रुपद भी इस शिवलिंग की आराधना करते थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में कुछ समय तक रहे थे। तभी से यह स्थान शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
विशेषता
बनखंडी नाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता परिसर में स्थित 108 शिवलिंग हैं, जो सरोवर के चारों ओर स्थापित हैं। श्रद्धालु इन सभी शिवलिंगों का जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव परिवार, नौ देवी मंदिर, संतोषी माता मंदिर सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं। यह परिसर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। सावन के दौरान यहां विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है।
बाबा बनखंडी नाथ मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, भगवान शिव उसकी प्रार्थना अवश्य सुनते हैं। मंदिर की पौराणिक महत्ता के कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
अमृत पुरी महाराज, पुजारी
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सावन माह को देखते हुए मंदिर परिसर में साफ-सफाई, जलाभिषेक और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सेवा कार्य में स्वयंसेवक भी लगातार सहयोग कर रहे हैं।
दक्ष राठौर, सेवादार