रुहेलखंड विवि के 'डिग्री मॉडल' की मुरीद हुईं राज्यपाल, यूपी के बाकी विश्वविद्यालयों को भी लागू करने का दिया निर्देश
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डिजिटल उपाधि वितरण मॉडल की सराहना की और इसे अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू ...और पढ़ें

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
HighLights
रुवि के 24वें दीक्षा समारोह में जनभवन से ऑनलाइन जुड़ीं राज्यपाल
समारोह में 85 मेधावियों को मिला पदक, 104 शोध उपाधि से सम्मानित
हिमांशु अग्निहोत्री, बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के उपाधि वितरण माॅडल को प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों को भी अपनाना चाहिए। सत्र 2025-26 में रुवि द्वारा 1,00,631 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई है, जो डिजिलाकर पर भी उपलब्ध होंगी। विवि प्रशासन से इस डिजिटल विधि की पूरी जानकारी ली जाएगी।
जनभवन में संभावित बैठक के बाद विद्यार्थियों को डिग्री और उपाधियां प्राप्त करना और अधिक सुगम हो जाएगा। ये बातें, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित 24वें दीक्षा समारोह में कहीं। दीक्षा समारोह के दौरान उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, तकनीक-युक्त और छात्र-हितैषी बनाने पर विशेष बल दिया गया।
उपाधि वितरण की आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था से युवाओं का समय बचेगा और उन्हें प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्यपाल ने कहा, विवि और कालेजों का दो बजे जब कार्य समाप्त हो जाता है तो जिन बच्चों की पढ़ाई छूट गई है, उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करें।
युवाओं को दिया संदेश, बड़े सपने देखिए
राज्यपाल ने कहा, दीक्षा समारोह अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र में योगदान का नवीन आरंभ है। बीते दिनों भारत की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 राॅकेट का सफल प्रक्षेपण किया। प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र को भी अंतरिक्ष से जोड़ा है। यह दर्शाता है कि हौसले से कामयाबी मिलती है।
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राॅकेट बनाने वालों में 26 से 30 वर्ष के युवा हैं। यह सब विश्व को भारत की प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। सफलता संयोग से नहीं, निर्णय से मिलती है। युवाओं से आग्रह किया कि बड़े सपने देखिए, भविष्य उनका होता है जो अवसर का निर्माण करते हैं।
यही विश्वास के साथ भारत आगे बढ़ रहा है। देश में नए आईआईटी, आईआईएम और एम्स बन चुके हैं, यह आंकड़े नहीं, बल्कि अवसर है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच जाग्रत करने के लिए प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।
निरंतर आगे बढ़ रहीं बेटियां, यह गर्व करने का क्षण
स्वर्ण पदक विजेताओं में बेटियों की संख्या अधिक होना गर्व की बात है। यह दर्शाता है कि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही हैं। बीते वर्षों की तरह यह आंकड़ा उत्साहित करने वाला है। सफलता में समानता होना भी जरूरी है, विवि प्रशासन डाटा उपलब्ध कराएं कि मेधावियों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र से कितने हैं?
खेल सुविधाओं को बढ़ाने की आवश्यकता
2030 में गुजरात में होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने ‘खेलो इंडिया’ योजना के तहत 2036 तक 36,441 करोड़ रुपये की स्वीकृति का भी उल्लेख किया। कहा, यह देखने के जरूरत है कि खेल मैदानों की क्या स्थिति है, वे खेलने योग्य हैं या नहीं।