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    कैंची धाम ही नहीं, बरेली के इस प्राचीन मंदिर पर भी है बाबा नीब करौरी की विशेष कृपा; दर्शन मात्र से दूर होते हैं सारे कष्ट

    Updated: Sun, 17 May 2026 06:10 AM (GMT+05:30)

    बरेली के बिहारीपुर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर की नींव 1962 में बाबा नीब करौरी ने रखी थी, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर धार्मिक ...और पढ़ें

    बिहारीपुर हनुमान गली स्थित प्राचीन श्री हनुमान मंदिर और मंदिर में विराजमान बाबा नीब करौरी

    बिहारीपुर हनुमान गली स्थित प्राचीन श्री हनुमान मंदिर और मंदिर में विराजमान बाबा नीब करौरी

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    1. बरेली के बिहारीपुर खत्रियान स्थित हनुमान गली में स्थापित है प्राचीन मंदिर

    मनीस पांडेय, बरेली। शहर के बिहारीपुर स्थित हनुमान गली का प्राचीन श्री हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वर्षों पुराना यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण भी लोगों के बीच विशेष पहचान रखता है।

    मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी नींव सन् 1962 में प्रसिद्ध संत बाबा नीब करौरी ने अपने हाथों से रखी थी। यही कारण है कि मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था गहरी है। बिहारीपुर खत्रियान क्षेत्र में स्थित मंदिर की प्रसिद्धि इतनी बढ़ी कि समय के साथ पूरी गली का नाम ही हनुमान गली पड़ गया।

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    आसपास रहने वाले लोग बताते हैं कि वर्षों से यहां सुबह-शाम श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष भीड़ रहती है, जबकि बड़े मंगल और हनुमान जयंती जैसे अवसरों पर यहां व‍िशेष आयोजन किए जाते हैं।

    मंदिर के पुजारी पंडित राकेश शर्मा ने बताया कि उनके पिता पंडित विश्वनाथ शर्मा करपात्री जी महाराज के शिष्य थे। उन्होंने लंबे समय तक धर्म जागरण और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया। करपात्री जी के साथ रहते हुए उन्होंने कई धार्मिक कार्यक्रमों और मंदिर स्थापना कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

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    उसी दौरान उनकी मुलाकात बाबा नीब करौरी से हुई थी। पंडित राकेश शर्मा के अनुसार मंदिर स्थापना के समय बाबा नीब करौरी बरेली में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उस दौरान पंडित विश्वनाथ शर्मा ने उनकी सेवा की और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।

    बाबा नीब करौरी ने हनुमान मंदिर निर्माण का आशीर्वाद देते हुए स्वयं मंदिर की नींव भरने का कार्य किया था। मंदिर के प्रारंभिक निर्माण में लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। उस समय यह क्षेत्र काफी शांत था, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद यहां धार्मिक गतिविधियां लगातार बढ़ती चली गईं।

    हनुमान जी के साथ प्रभु राम व कृष्ण विराजमान

    सबसे पहले यहां हनुमान जी की मूर्ति सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री से तैयार कराई गई थी। वह प्राचीन प्रतिमा अब भी मंदिर परिसर में स्थापित है और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वर्षों बाद मंदिर का विस्तार किया गया और परिसर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं।

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    मंदिर में वर्तमान समय में श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण, शिवलिंग सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं। बाबा नीम करौरी की प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना और आरती होती है।

    विशेष अवसरों पर भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। सावन, नवरात्र और रामनवमी जैसे पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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