शाहजहांपुर हादसा: बेटे के सिर पर बंधना था सेहरा, कफन में लिपटा मिला शव; भाई-भांजा भी जिंदगी के लिए कर रहे संघर्ष
शाहजहांपुर में एक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। जिस अरुण की 40 दिन बाद शादी होनी थी, उसकी दुर्घटना में मौत हो गई। परिवार में कोह ...और पढ़ें

अल्हागंज में कार व रोडवेज की भिडंत के बाद क्षतिग्रस्ते कार व बस। जागरण
HighLights
अरुण की 40 दिन बाद होनी थी शादी
सड़क हादसे में दूल्हे अरुण की मौत हुई
भाई अनिल और भांजा अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहे
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। जिस घर में 40 दिन बाद शादी की शहनाइयां बजनी थीं, वहां मातम पसर गया। राजवती का बेटे अरुण के सिर पर सेहरा बांधने का सपना था, इसलिए उन्होंने उसकी शादी तय कर दी थी, लेकिन शादी से पहले ही अरुण की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। हादसे की जानकारी के बाद से परिवार के लोगों में कोहराम मचा हुआ है।
पिता गुरचरन लाल के निधन के बाद अरुण व अनिल ने ही परिवार की जिम्मेदारी संभाली। बहनों की शादी के बाद मां राजवती ने बहू लाने की जिद की तो अरुण को सहमति देनी पड़ी। अरुण का तिलक हो चुका था, 20 अप्रैल को शादी होनी थी। कार्ड बांटे जा रहे थे, लेकिन हादसे ने परिवार की खुशियों केा ग्रहण लगा दिया।
जिस बेटे के सिर पर सेहरा बांधने की तैयारी थी, उसका शव कफन में लिपटा हुआ घर पहुंचा। 26 वर्षीय अरुण के पिता गुरचरन लाल की करीब 20 वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। पांच बहनों की शादी के बाद अरुण व अनिल ही मां राजवती का सहारा थे।
अरुण अपनी शादी से पहले एक कार लेना चाह रहे थे। एक परिचित के माध्यम से इटावा में कार खरीदना तय हो गया था। फास्ट-फूड की दुकान चलाने वाले छोटे भाई अनिल भी बराबर से सहयोग कर रहे थे, लेकिन उससे पहले यह हादसा हो गया। अस्पताल में भर्ती अनिल से जब रिश्तेदारों ने बात की तो वह बार-बार अरुण के बारे में पूछ रहे थे लेकिन उन्हें सच्चाई नहीं बताई गई। उनके साथ रह रहा भांजा भी जिंदगी के लिए अस्पताल में संघर्ष कर रहा है।
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इकलौते बेटे के सिर से उठा पिता का साया
मोहम्मदी क्षेत्र के मूड़ा खालसा गांव निवासी संजय कुमार की मृत्यु से उनके इकलौते बेटे अभिजीत के सिर से पिता का साया छिन गया। अभिजीत की अब पूरी जिम्मेदारी पत्नी पिंकी देवी पर आ गई। संजय तीन भाई-बहनों में बड़े थे। उनका छोटा भाई शैलेंद्र व बहन कल्पना, मां मुन्नी देवी व पिता बालकराम हैं।
मां को क्या बताएंगे
ऋषभ के पिता महेंद्र कुमार श्रीवास्तव की दो वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। ऋषभ पांच भाई-बहनों में दूसरे नंबर के थे। हादसे की सूचना पर उनके बड़े भाई अनुराग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। यहां भाई का शव देख वह रोते हुए कह रहे थे कि मां खिलौना देवी को घर जाकर क्या बताएंगे, कैसे शव घर ले जाएंगे। रिश्तेदारों ने उन्हें ढांढस बंधाया।