चीनी महंगी लेकिन घटी गन्ने की मिठास: यूपी के 3 जिलों में गन्ने का रकबा घटा, जानें मुख्य वजह
उत्तर प्रदेश के तीन जिलों बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में गन्ने का रकबा घट गया है, जिससे चीनी मिलों को ...और पढ़ें

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HighLights
सबसे अधिक शाहजहांपुर में 13.61 प्रतिशत कम हुआ गन्ने का रकबा
मंडल में सिर्फ बदायूं जनपद में गन्ने के रकबा में 5.93 प्रतिशत वृद्धि
कमलेश शर्मा, बरेली। अचानक चीनी के दाम बढ़ने पर देशभर में हलचल मच गई है। मूल्य को नियंत्रित करने के लिए विदेश से चीनी का आयात कराया जा रहा है। मंडल की चीनी मिलों में पेराई सत्र पंद्रह दिन पहले शुरू कराने की तैयारी की जा रही है, लेकिन गन्ने का रकबा बढ़ने की बजाय घट गया है।
गन्ना विभाग की ओर से कराए गए सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बरेली में 3.10 प्रतिशत, पीलीभीत में 5.93 प्रतिशत और शाहजहांपुर में सबसे अधिक 13.61 प्रतिशत रकबा कम हुआ है। हालांकि बदायूं में रकबा 5.48 प्रतिशत बढ़ा है।
गन्ने का रकबा कम होने के पीछे चीनी मिलाें से गन्ना मूल्य का समय पर भुगतान न मिलना, निराश्रित पशुओं और बंदरों के फसल बर्बाद करने को मुख्य कारण माना जा रहा है।
मंडल के चारों जिलों में 16 चीनी मिले हैं, जिनमें से ओसवाल चीनी मिल नवाबगंज बंद चल रही है। पिछले पेराई सत्र में अपेक्षित गन्ना नहीं मिल पाने से चीनी मिलों में पेराई समय से पहले बंद करनी पड़ गई थी।
| जिला | वर्ष | गन्ना का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) |
| बरेली | 2025-26 | 1,01,321 |
| बरेली | 2026-27 | 98,121 |
| पीलीभीत | 2025-26 | 1,02,792 |
| पीलीभीत | 2026-27 | 96,697 |
| शाहजहांपुर | 2025-26 | 1,00,825 |
| शाहजहांपुर | 2026-27 | 87,103 |
| बदायूं | 2025-26 | 17,014 |
| बदायूं | 2026-27 | 17,948 |
गन्ना विभाग के अधिकारियों से लेकर गन्ना समितियों, चीनी मिल प्रबंधन को रकबा बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। मंडल मुख्यालय से लेकर शासन स्तर से भी समीक्षा होती रही, लेकिन रकबा बढ़ने की बजाय कम हो गया। बरेली जिले में 3.10 प्रतिशत रकबा कम हुई है।
नई पौध लगाने में 1.42 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पेड़ी में 4.81 प्रतिशत की कमी आई है। पीलीभीत जिले में रकबा 5.93 प्रतिशत कम हुआ है। नई पौध में 8.87 प्रतिशत जबकि पेड़ी में 2.76 प्रतिशत की गिरावट आई है।
शाहजहांपुर में सर्वाधिक 13.61 प्रतिशत रकबा कम हो गया है। नई पौध में 11.26 प्रतिशत और पेड़ी में 15.68 प्रतिशत की कमी आई है। बदायूं जिले में रकबा 5.48 प्रतिशत बढ़ा है।
नई पौध लगाने में 13.44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, हालांकि पेड़ी में यहां भी 5.53 प्रतिशत की कमी आई है। गन्ने का रकबा कम होने के मुख्य कारणों की बात करें तो चीनी मिलों से गन्ना मूल्य का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा है।
इसके अलावा निराश्रित पशुओं और बंदरों के फसल बर्बाद करने की वजह से भी किसानों का नकदी फसल गन्ना से मोह भंग हो रहा है। पिछले पेराई सत्र में चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पाया था, इस बार रकबा और कम हो गया है, इससे गन्ना संकट बने रहने के आसार दिख रहे हैं।
मंडलभर में गन्ने का सर्वे कराया गया है। बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों में रकबा थोड़ा कम हुआ है, जबकि बदायूं में बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों से देखा गया है कि एक साल रकबा कम होता और दूसरे साल बढ़ जाता है। सर्वे रिपोर्ट में बंदरों और निराश्रित पशुओं के फसल बर्बाद करने की वजह भी के कारण बताई गई है। नए पेराई सत्र के लिए चीनी मिल प्रबंधकों को अभी से मशीनों की ओवरहालिंग और मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- राजेश मिश्र, उप आयुक्त गन्ना
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