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    मुस्लिम बेटियों को मोबाइल फोन नहीं, शिक्षा व संस्कार दें: उर्स-ए-रजवी में उलमा का संदेश

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:05 AM (IST)

    बरेली में उर्स-ए-रजवी के मंच से उलमा ने मुस्लिम बेटियों को मोबाइल फोन नहीं, अच्छी शिक्षा व संस्कार देने की बात कही। उन्होंने मुस्लिमों को शैक्षणिक संस ...और पढ़ें

    इस्लामियां स्थित उर्स स्थल पर जुमे की नमाज अता करते जायरीन।

    इस्लामियां स्थित उर्स स्थल पर जुमे की नमाज अता करते जायरीन।

    HighLights

    1. मुस्लिम बेटियों को मोबाइल नहीं, अच्छी शिक्षा-संस्कार दें।

    2. मुस्लिमों को अपने क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थान खोलने चाहिए।

    3. युवा नशे से दूर रहें, बेवजह के प्रदर्शनों से बचें।

    जागरण संवाददाता, बरेली। उर्स-ए-रजवी के मंच से शुक्रवार को सामाजिक सुदृढ़ता-सुधार की बात उठी, विदेश की परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। उलमा ने कहा कि मुस्लिम बेटियों के हाथ में मोबाइल फोन नहीं, अच्छी शिक्षा व संस्कार दें। मुस्लिमों को अपने क्षेत्र में विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थान खोलने चाहिए।

    उन्होंने अमेरिका-ईरान के युद्ध पर भी अपना नजरिया स्पष्ट किया। कहा कि यह युद्ध धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक था। ईरान यदि इस्लाम के लिए आवाज उठाता तो पहले फलस्तीन, गाजा या अफगानिस्तान के हित में लड़ता।

    आला हजरत के उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में देर रात अलग विषयों पर कांन्फ्रेंस हुईं। कारी यूसुफ रजा ने मुस्लिम बेटियों के बहकते कदमों पर चिंता जताई।

    कहा कि उन्हें कानून ए शरीयत जैसी पुस्तकें दें, ताकि वे समझ सकें कि सही रास्ता क्या है। मुफ्ती सलीम नूरी ने अमेरिका-ईरान के युद्ध को राजनीतिक बताया। कहा कि हमें अपने देश को मजबूत करने के बारे में सोचना चाहिए, इसके लिए शैक्षणिक परिवेश मजबूत करें। नौजवानों से अपील की कि नशे से दूर रहकर अपने व परिवार के भविष्य को संवारें।

    बेवजह के धरना-प्रदर्शनों से दूर रहें। हमारे कई बेगुनाह नौजवान वर्षों से जेल में बंद हैं। यदि कोई विवाद सामने आए तो कानून, पुलिस-प्रशासन का सहारा लें। बोले, मदरसों को आतंकवाद का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा, जबकि वहां देशप्रेम का पाठ पढ़ाया जाता है।

    मजहब-ओ-मसलक कान्फ्रेंस की अध्यक्षता दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) ने की। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की देखरेख में इसका आयोजन हुआ। इससे पहले, सुबह से देर रात तक जायरीन ने दरगाह पहुंचकर चादरपोशी की। शनिवार को कुल की रस्म के साथ उर्स-ए-रजवी का समापन होगा।

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