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    मरे हुए व्यक्ति ने किए साइन! बरेली RTO में मौत के 1 साल बाद ऐसे बदल गया कार का मालिक

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 11:56 PM (IST)

    बरेली आरटीओ में एक मृतक के फर्जी हस्ताक्षर से कार दूसरे के नाम ट्रांसफर करने का मामला सामने आया है। अजय वर्मा की 2019 में मृत्यु के बाद 2020 में उनकी ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    HighLights

    1. तत्कालीन आरटीओ, एआरटीओ और पटक सहायक की भूमिका पर सवाल

    2. विशाल वर्मा व परिवहन विभाग के अज्ञात कर्मचारी के विरुद्ध दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी

    जागरण संवाददाता, बरेली। पांच साल पहले संभागीय परिवहन विभाग में मृतक के फर्जी हस्ताक्षर से कार दूसरे के नाम ट्रांसफार्मर कराने के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विभाग में खलबली मच मच गई है। विभाग में पत्रावली तलाशी जा रही है। तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारियों की भी जानकारी निकाली जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि कार ट्रांसफर करने में फर्जीवाड़ा हुआ या धोखाधड़ी की गई है। पुलिस की विवेचना और विभागीय जांच में दोषी जो भी मिलेगा उस पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

    बारादरी के सुपर सिटी निवासी अजय वर्मा की 14 जुलाई 2019 को मृत्यु हो गई। वह ट्रेवल एजेंसी संचालित करते थे, कई गाड़ियों को किराये पर चलवाते थे। उनकी पत्नी नंदिनी वर्मा का कहना है कि वह परिवहन विभाग में वारिसान नहीं दे पाई थीं। इसलिए गाड़ियां उनके पति के नाम पर ही चल रहीं थीं।

    कुछ दिनों पहले उन्होंने अपनी एक कार को पोर्टल पर चेक किया तो पता चला कि वह कार उनके देवर विशाल वर्मा के नाम पर ट्रांसफर हो गई है। उन्होंने संभागीय परिवहन विभाग में आरटीआइ डालकर जानकारी मांगी तो पता चला कि उस कार को दो सितंबर 2020 को उनके पति के माध्यम से उनके देवर को ट्रांसफर कर दी गई, जबकि उनके पति की मृत्यु वर्ष 2019 में हो चुकी थी।

    दस्तावेजों पर उनके पति के हस्ताक्षर भी हिंदी में किए गए थे। नंदिनी के अनुसार उनके पति हमेशा अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते थे। उनकी तहरीर पर पुलिस ने विशाल वर्मा और परिवहन विभाग के अज्ञात कर्मचारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। प्रकरण उजागर होने के बाद परिवहन विभाग संबंधित पत्रावली तलाशी जा रही है।

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    यह प्रकरण जिस समय का है उस समय यहां आरटीओ प्रशासन के पद पर डा. अनिल गुप्ता, एआरटीओ आरपी सिंह और संबंधित पटल सहायक राजकिशोर गुप्ता कार्यरत थे। इनमें से डा. अनिल गुप्ता और राजकिशोर गुप्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि आरपी सिंह वर्तमान में अयोध्या में एआरटीओ के पद पर हैं। इनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    फर्जीवाड़ा हुआ है या धोखाधड़ी की गई है, जांच में सब सामने आ जाएगा। इस संबंध में आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह का कहना है कि रूटीन प्रक्रिया में आरटीआइ का जवाब दिया गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला संज्ञान में आया है तो संबंधित पत्रावली की तलाश कराई जा रही है। पत्रावली की जांच करने पर जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।


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