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बस्ती में IPS अधिकारी के पिता की हत्या मामले में सजा, नौ दोषियों को 10 साल की जेल

Updated: Sat, 15 Aug 2026 02:00 AM (IST)

बस्ती में आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद के पिता राजेश यादव की गैर इरादतन हत्या के मामले में कोर्ट ने नौ दोषियों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई है। यह घटना 2020 में हुई थी।

आईपीएस अधिकारी के पिता की हत्या में नौ दोषियों को 10-10 वर्ष कैद।

आईपीएस अधिकारी के पिता की हत्या में नौ दोषियों को 10-10 वर्ष कैद।

HighLights

  1. आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद के पिता की हत्या का मामला।

  2. बस्ती कोर्ट ने नौ दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई।

  3. प्रत्येक दोषी पर साढ़े सात हजार रुपये का अर्थदंड भी।

विधि संवाददाता, बस्ती। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में अधिकारी बजरंग प्रसाद के पिता राजेश यादव की गैर इरादतन हत्या के मामले में बस्ती के अपर जिला जज प्रथम कमलेश कुमार ने नौ दोषियों को 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

बजरंग प्रसाद वर्तमान में मेरठ में अंडर ट्रेनी आईपीएस हैं और प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद अकादमी गए हैं। उनके पिता की वर्ष 2020 में गांव के लोगों ने हत्या कर दी थी।पिता की हत्या के बाद भी उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। घटना के समय वह दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

मां ने उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें पिता के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं होने दिया। बजरंग ने तैयारी जारी रखी और वर्ष 2023 में तीसरे प्रयास में 454वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बने।

अभियोजन की ओर से प्रस्तुत सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मीकांत द्विवेदी एवं वेद प्रकाश पांडेय ने न्यायालय को बताया कि कलवारी क्षेत्र के धोबहट गांव में नौ अगस्त 2020 की सुबह उमेश और दिनेश खेत में चरी काट रहे थे। इसी दौरान गांव के जगदीश से विवाद होने पर उन लोगों ने लाठी से मारपीट की।

उमेश-दिनेश के सगे भतीजे बजरंग के पिता राजेश यादव भाइयों पर हमले सूचना मिलते ही बाइक से घटनास्थल की ओर जा रहे थे। पक्के पुल बांध के पास कई लोगों ने उन पर हमला कर दिया। जिला अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने राजेश यादव को मृत घोषित कर दिया।

बजरंग के भाई अंबिका प्रसाद की तहरीर पर पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद सभी नौ आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया।

पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने दोषियों को सजा सुनाते हुए प्रत्येक दोषी पर साढ़े सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना न देने पर चार माह पांच दिन की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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