बस्ती में पूर्व प्रधान और सचिव से होगी 33 लाख की अनियमित भुगतान की वसूली, जांच में खुला खेल
बस्ती के दुबौलिया विकास खंड की बरदिया लोहार ग्राम पंचायत में 33.62 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में जिलाधिकारी ने निवर्तमान प्रधान और सचिव ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बस्ती में 33.62 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला।
निवर्तमान प्रधान और सचिव से बराबर वसूली का आदेश।
प्रतिबंधित फर्म को भुगतान और व्यक्तिगत खाते में मजदूरी।
संवादसूत्र, दुबौलिया, (बस्ती)। जिलाधिकारी ने दुबौलिया विकास खंड के बरदिया लोहार ग्राम पंचायत में 33 लाख 62 हजार 657 रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रधान व सचिव के विरुद्ध सरकारी धन के एक बराबर वसूली का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता सूरज ने शपथ पत्र के साथ पिछले वर्ष डीएम से शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत बरदिया लोहार में विकास कार्यो के नाम पर वित्तीय अनियमितता की गई। श्रमिकों को उनके खाते में भुगतान करने की बजाए व्यक्तिगत खाते में लिया गया। प्रकरण की प्रारंभिक जांच उपायुक्त श्रम रोजगार व उपायुक्त वाणिज्य कर की संयुक्त टीम से कराई गई।
मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर प्रधान अंजली के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार प्रतिबंधित कर दिए गए। विकास कार्यो में कोई बाधा न आए इसके लिए ग्राम पंचायत सदस्यों की तीन सदस्यी टीम गठित की गई। इसी बीच प्रधान हाईकोर्ट चली गईं। हाईकोर्ट ने पांच फरवरी 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में प्रधान के अधिकारों को डीएम ने बहाल कर दिया।
प्रकरण की अंतिम जांच के लिए डीडीओ व जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियों को निर्देशित किया गया। दोनों अधिकारियों ने जांच पूरी कर रिपोर्ट डीएम को 18 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत कर दी। इसमें प्रधान शासनादेश के विपरीत अपने जेठ उदय सिंह के नाम पंजीकृत फर्म पाविका इंटप्राइजेज के पक्ष में धनराशि भुगतान करने व मनरेगा श्रमिकों के मजदूरी का भुगतान व्यक्तिगत खाते में प्राप्त करने की दोषी पाई गईं। हालांकि श्रमिकों ने नोटरी शपथ पत्र देकर बताया कि उनके कहने पर ग्राम प्रधान द्वारा मजदूरी की धनराशि उन्हें नकद दी गई।
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इससे स्पष्ट है कि ग्राम प्रधान द्वारा मजदूरी की धनराशि का भुगतान अपने खाते में प्राप्त किया गया है, किन्तु उसका गबन न करके मजदूरों को नकद भुगतान किया गया है। परिशीलन के उपरान्त यह पाया गया कि प्रारम्भिक जांच एवं अन्तिम जांच दोनों में ग्राम प्रधान अंजली एवं विनय कुमार शुक्ल, ग्राम विकास अधिकारी (तत्कालीन ग्राम सचिव) ने संयुक्त रूप से शासनादेश के अनुसार निषिद्ध श्रेणी की फर्म को वेंडर के रूप में चयनित करके फर्म को 33,62,657 रुपये का अनियमित भुगतान किया है, जिसकी वसूली इनसे बराबर-बराबर किया जाना नियम संगत है।
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ऐसे में अनियमित रूप से भुगतान की गई धनराशि की आधी रकम 16,81,320 रूपये निर्वतमान ग्राम प्रधान से भू-राजस्व के बकाए की भांति वसूल कर ग्राम निधि-प्रधम में जमा करने का आदेश दिया गया है। वहीं अवशेष धनराशि 16,81,320 रुपये तत्कालीन ग्राम सचिव के वेतन से नियमानुसार वसूल करने के लिए डीडीओ को आदेशित किया गया है।