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    उम्रकैद कैदी का होगा लीवर प्रत्यारोपण, बस्ती जेल प्रशासन खर्च करेगा 14 लाख रुपये

    Updated: Fri, 29 May 2026 12:46 PM (IST)

    बस्ती जेल प्रशासन ने उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी राजेश चौहान के लीवर प्रत्यारोपण के लिए 14 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। कैदी का इलाज एसजीपीजीआई ...और पढ़ें

    जेल ने पेश किया मानवीय संवेदना का बड़ा उदाहरण। जागरण

    जेल ने पेश किया मानवीय संवेदना का बड़ा उदाहरण। जागरण

    HighLights

    1. बस्ती जेल कैदी के लीवर प्रत्यारोपण पर 14 लाख खर्च।

    2. राजेश चौहान का इलाज एसजीपीजीआई लखनऊ में जारी।

    3. जेल प्रशासन ने अंगदान हेतु परिजनों से संपर्क साधा।

    स्कन्द कुमार शुक्ला, बस्ती। मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए प्रदेश शासन ने जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी के जीवन को बचाने के लिए एक बड़ा और सराहनीय निर्णय लिया है। हत्या के मामले में सजा काट रहे कैदी राजेश चौहान को लीवर की गंभीर बीमारी के उपचार के लिए लीवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है, जिसके लिए शासन ने 14 लाख रुपये की धनराशि मंजूर की है।

    जेल में रहने के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ी और उसे लीवर संबंधी गंभीर समस्या का पता चला। सबसे पहले जिला अस्पताल, फिर कैली मेडिकल ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज, लखनऊ के राममनोहर लोहिया मेडिकल कालेज, केजीएमयू के बाद अब एसजीपीजीआई में उपचार कराया जा रहा है।

    उम्रकैद की सजा काट रहे 41 वर्षीय कैदी राजेश चौहान पुत्र ह्रदयराम निवासी महुघाट, थाना हर्रैया की जान बचाने के लिए जेल प्रशासन ने न केवल 14 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने का निर्णय लिया है, बल्कि उसके उपचार के लिए विशेषज्ञों की निगरानी में विशेष प्रबंध भी किए हैं।

    कई बड़े अस्पतालों से होकर एसजीपीजीआई पहुंचा मामला
    जेल प्रशासन के अनुसार, उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी राजेश पिछले साल 17 मई 2025 को जेल में कैदी के रूप सजा काटने आए थे। उन्हें हत्या के एक मामले में अपर जिलाजज की अदालत से दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जेल में आते ही वह लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

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    राजेश का इलाज पहले जिला अस्पताल और कैली, बीआरडी मडिकल कालेज फिर राज्य बड़े चिकित्सा संस्थान आरएमएल (राम मनोहर लोहिया) और केजीएमयू लखनऊ उपचार में कराया गया। हालांकि, स्थिति में सुधार न होने पर अब उसे लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में शिफ्ट किया गया है, जहां उसका उपचार जारी है।

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    लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 14 लाख की मंजूरी
    चिकित्सकों ने राजेश की जान बचाने का एकमात्र विकल्प लीवर ट्रांसप्लांट बताया है। इस जटिल सर्जरी और उसके बाद की दवाओं व देखरेख का खर्च लगभग 14 लाख रुपये आ रहा है। जेल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी राशि वहन करने की स्वीकृति दे दी है।

    अंगदान के लिए स्वजन से संपर्क
    लीवर ट्रांसप्लांट के लिए अंगदाता (डोनर) की आवश्यकता होती है। इस दिशा में जेल प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए कैदी के परिवार के सदस्यों से संपर्क साधा है। प्रशासन ने उनसे बात कर उन्हें लीवर दान करने की प्रक्रिया के बारे में समझाया है और उनसे इस कठिन समय में आगे आने की अपील की है ताकि कैदी को नई जिंदगी दी जा सके।


    एसजीपीजीआई के विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में राजेश का इलाज चल रहा है। सुरक्षा के मद्देनजर वहां पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कानूनी प्रक्रिया के साथ कैदी का उपचार जारी है। सजा काटना अपनी जगह है, लेकिन बीमारी की स्थिति में स्वास्थ्य का अधिकार किसी भी कैदी से नहीं छीना जा सकता। न्याय प्रणाली का उद्देश्य सुधार है, न कि किसी की जान लेना। कैदी भले ही कानून की नजर में दोषी है, लेकिन मानवीय आधार पर उसे बेहतर इलाज मुहैया कराना जेल प्रशासन का दायित्व है। इलाज के बजट के लिए जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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    : एसपी मिश्र, जेल अधीक्षक, बस्ती