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    बस्ती में थानाध्यक्ष की सूझबूझ से 10 साल पुराना भूमि विवाद सुलझा, भाइयों ने गले मिलकर खत्म की रंजिश

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 01:16 PM (IST)

    बस्ती के दुबौलिया थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष जीवन त्रिपाठी की पहल से दो भाइयों के बीच दस साल पुराना भूमि विवाद सुलझ गया। रामबुझारत और रवींद्र नाथ मिश ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. थानाध्यक्ष जीवन त्रिपाठी की पहल से विवाद सुलझा।

    2. बस्ती में दस साल पुराना भूमि विवाद समाप्त हुआ।

    3. दोनों भाइयों ने गिले-शिकवे भुलाकर गले लगाया।

    स्कन्द कुमार शुक्ला, बस्ती। पुलिस का काम केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि समाज में शांति और आपसी सौहार्द कायम करना भी है। इसका जीवंत उदाहरण जनपद के दुबौलिया थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां थानाध्यक्ष की सूझबूझ और सकारात्मक पहल से दो भाइयों के बीच पिछले एक दशक से चला आ रहा भूमि संबंधी विवाद चंद घंटों में समाप्त हो गया।

    पुलिस की इस पहल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। दस साल की कड़वाहट, एक अहम मुलाकात में आखिरकार समाप्त हो गई। दुबौलिया थाना क्षेत्र के जोगहटा गांव के रहने वाले दो भाइयों रामबुझारत मिश्र व रवींद्र नाथ मिश्र के बीच पिछले 10 वर्षों से भूमि विवाद को लेकर गहरी रंजिश चल रही थी।

    विवाद इतना पुराना और गहरा था कि दोनों पक्षों के बीच बोलचाल पूरी तरह बंद थी और मामला पुलिस व कचहरी की चौखट तक पहुंच चुका था। कई बार सामाजिक स्तर पर पंचायतें हुईं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

    पुलिस के इस संवेदनशील रवैये को देख थाने पर मौजूद लोग और स्थानीय ग्रामीण गदगद हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हर विवाद का निपटारा इसी तरह संवाद के माध्यम से हो जाए, तो कोर्ट-कचहरी के चक्करों से आम जनता को मुक्ति मिल जाएगी। थानाध्यक्ष दुबौलिया की इस कार्यशैली की जिले के उच्चाधिकारियों द्वारा भी सराहना की जा रही है।

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    थानाध्यक्ष ने निभाई जिम्मेदार मध्यस्थ की भूमिका

    मामले की गंभीरता और वर्षों पुरानी दुश्मनी को देखते हुए एक पक्ष ने पहले यूपी 112 पीआरवी और स्थानीय पुलिस को विवाद की सूचना दी तो थानेदार दुबौलिया जीवन त्रिपाठी ने स्वयं पहल करके दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया।

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    एसओ ने न केवल कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया, बल्कि एक जिम्मेदार मध्यस्थ की तरह दोनों भाइयों को समझाया कि मुकदमों और विवादों में केवल समय और धन की बर्बादी होती है।आपसी प्रेम ही जीवन का असली जीवन का आधार है।

    दस वर्षों के बाद गले मिले दाेनों भाई, आंखों में आए आंसू

    थानेदार जीवन के समझाने का असर ऐसा हुआ कि दोनों भाइयों के दिलों की जमी बर्फ पिघल गई। दस साल से एक-दूसरे के खून के प्यासे दिख रहे भाइयों ने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और एक-दूसरे को गले लगाकर पुरानी रंजिश खत्म करने का संकल्प लिया। दोनों ने भविष्य में शांतिपूर्वक रहने का लिखित आश्वासन भी दिया।


    हमारा प्रयास है कि छोटे-मोटे पारिवारिक और जमीनी विवादों को आपसी सहमति से सुलझाया जाए ताकि समाज में कटुता न फैले। पुलिस जनता की मित्र है और शांति व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है।

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    -जीवन त्रिपाठी, थानाध्यक्ष, दुबौलिया, बस्ती