बस्ती में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी, 2100 महिलाएं गाएंगी 'रामजी का सोहर'
बस्ती में 2100 महिलाएं गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए 'रामजी का सोहर' गाएंगी। यह आयोजन भारतीय लोक-संस्कृति, मातृशक्ति और महिला स्वावलंबन को ब ...और पढ़ें
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बस्ती क्लब में आयोजित रामजी का सोहर कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में उपस्थित महिलाएं

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जागरण संवाददाता, बस्ती। अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह, बस्ती क्लब में जिले की 21 सौ महिलाएं सोमवार को रामजी का सोहर गाएंगी। इसकी तैयारी के लिए महिलाओं ने न सिर्फ भक्तिमय रंगारंग कार्यक्रम किया बल्कि उन्होंने सोहर गाने का पूर्वाभ्यास भी किया।
गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए पहल संस्था के संरक्षक व भाजपा नेता मनीष मिश्र भी कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने अपनी सभी बहनों से प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा और इस महाअभियान का संकल्प दोहराया। पूर्वाभ्यास के दौरान महिलाएं एक रंग में नजर आ रही थीं। उन्होंने कार्यक्रम का रंगारंग शुभारंभ किया।

विश्व रिकॉर्ड बनाने का होगा प्रयास
प्रस्तावित सामूहिक सोहर गायन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। आयोजक मंडल मनीष मिश्र, जीडी मिश्र एवं संजय मिश्र के अनुसार 2100 महिलाएं एक साथ सोहर गायन कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगी। यह आयोजन भारतीय लोक-संस्कृति, मातृशक्ति और महिला स्वावलंबन को एक साथ जोड़ने वाला अनूठा सांस्कृतिक प्रयास है।

‘सोहर’ भारतीय लोकजीवन की वह प्राचीन परंपरा है, जिसे संतान-जन्म और मांगलिक अवसरों पर महिलाओं द्वारा गाया जाता है। बस्ती में होने वाला यह आयोजन इसी लोकधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास है। संस्था के संरक्षक मनीष मिश्र ने बताया कि ‘पहल’ संस्था द्वारा चलाए जा रहे ‘रामजी का पेड़ा’ और ‘रामजी का झोला’ अभियान से जुड़ा यह आयोजन अगली कड़ी है।
बस्ती को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास
संस्था द्वारा महिलाओं को पेड़ा निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग और झोला निर्माण के लिए सिलाई मशीन जैसी सहायता उपलब्ध कराई गई है, जिससे वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्ती की मातृशक्ति, लोकपरंपरा और स्वावलंबन का उत्सव है।
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उन्होंने कहा कि बस्ती की महिलाएं अपने स्वर से यह संदेश देंगी कि भारतीय संस्कृति आज भी गांव-गांव और घर-घर में जीवंत है। ‘रामजी का सोहर’ के माध्यम से बस्ती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम समाज, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण तीनों को एक सूत्र में पिरोता है। आयोजक मंडल ने बताया कि कार्यक्रम में हजारों महिलाओं की भागीदारी, पारंपरिक लोकगायन और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
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