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    पूर्वांचल का ऐसा मंदिर जहां कुएं में विराजमान हैं ‘महादेव’, 15 फीट नीचे जाकर अभिषेक करते हैं श्रद्धालु

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 04:00 PM (IST)

    भदोही में काशी-प्रयाग के मध्य स्थित बाबा सेमराधनाथ धाम एक अनोखा शिव मंदिर है, जहाँ महादेव कुएं में विराजमान हैं। भक्त 15 फीट नीचे उतरकर जलाभिषेक करते ...और पढ़ें

    पूर्वांचल में स्थापित है ऐसा मंदिर जहां कुएं में विराजमान हैं ‘महादेव’।

    पूर्वांचल में स्थापित है ऐसा मंदिर जहां कुएं में विराजमान हैं ‘महादेव’।

    HighLights

    1. भदोही में गंगा तट पर स्थित अनोखा शिवधाम।

    2. महादेव कुएं में 15 फीट नीचे विराजमान हैं।

    3. मंदिर का इतिहास पांडव काल से जुड़ा है।

    जागरण संवाददाता, ऊंज (भदोही)। काशी-प्रयाग के मध्य मोक्षदायिनी के तट पर विराजमान बाबा सेमराधनाथ धाम की महिमा निराली है। पूरे पूर्वांचल में ऐसा ही निराला और अनूठा शिवधाम है काशी-प्रयाग के मध्य पतित पावनी गंगा के किनारे स्थित बाबा सेमराधनाथ का धाम। यहां कुएं में विराजमान हैं देवाधिदेव महादेव। भक्तों की अटूट आस्था है तो यहां भोलेनाथ के धाम की स्थापना की कहानी भी बेहद रोचक है।

    धार्मिक एवं पौराणिक सेमराधनाथ मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है। आजादी के पूर्व लगभग डेढ़ सौ साल पहले जब बस और ट्रेन की सुविधा नहीं थी तो व्यवसायी नाव से व्यापार करने आते थे।

    इसी दौरान एक दिन एक व्यापारी नाव पर माल लादकर गंगा में आ रहा था। बीच धारा में पहुंचते ही नाव फंस गई और नाव टस से मस नहीं हो रही थी। लाख जतन के बाद कोई सफलता नहीं मिली।

    उसी रात स्वप्न में भोलेनाथ ने कहा कि घमंड मत दिखा और खोदाई बंद करा दे। मेरा शिवलिंग जिस स्थान पर है वहीं स्थापित करके भव्य मंदिर निर्माण कराओ। व्यापारी ने सुबह ऐसा ही किया और वही शिवलिंग की स्थापना करवाकर नीचे पूजा पाठ करने जाने के लिए सीढ़ी बनवा दी।

    इतने सालों बाद भी करीब 15 फीट नीचे जाकर भक्त भोलेनाथ की पूजा करते हैं, लेकिन कभी कोई हादसा घटित नहीं हुआ। कुएं में विराजमान बाबा सेमराधनाथ स्वयंभू हैं। मान्यता है कि यहां पर जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा-अर्चन करता है उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है।

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    पांडव कालीन इतिहास की है मान्यता

    शिवलिंग स्थापना का इतिहास वैसे तो पांडवकालीन है। मान्यता है कि जब लाक्षागृह से किसी तरह बचकर निकलने के बाद पांडव गंगा किनारे-किनारे इस स्थान पर पहुंचे, तो यहां रक्षा के लिए युधिष्ठिर ने शिवलिंग की स्थापना की।

    बाद में समय बीतने के साथ ही गंगा के प्रवाह मार्ग में परिवर्तन के साथ ही शिवलिंग नदी की धारा में समा गया। बाद में स्वप्न के आधार पर व्यापारी नाविक की ओर से मंदिर का निर्माण कराया गया।

    कैसे पहुंचे बाबा सेमराधनाथ धाम

    यह प्राचीन मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जंगीगंज बाजार से सात किमी दूर दक्षिण दिशा में गंगा तट पर स्थित है। जंगीगंज बाजार से आटोरिक्शा व अन्य सवारी वाहन सहित निजी वाहनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    जीटी रोड पर स्थित चकपड़ौना से कौलापुर -सेमराध फोरलेन का निर्माण कराया गया है। इस मार्ग से भी आसानी से बाबा के दरबार में पहुंच सकते हैं। यहां सावन के अलावा प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु शीश झुकाते हैं।

    सेमराधनाथ धाम में गूंजने लगा हर-हर महादेव

    बाबा सेमराधनाथ धाम में सावन मास में हर-हर महादेव की गूंज सुनाई पड़ने लगी है। यहां कुएं में विराजमान देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक करने को शिवभक्त कांवड़ियों की भीड़ उमड़ती है।

    प्रयागराज से जल लेकर काशी में महादेव का जलाभिषेक करने वाले तमाम शिवभक्त सेमराध नाथ में भी जल चढ़ाकर आगे बढ़ते हैं। सेमराधनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष रामबली सिंह ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को साफ सफाई आदि की व्यवस्था पूरी कराई गई है।

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