कालीन उद्योग की समस्याओं का समाधान, एकमा की नई टीम के सामने बड़ी चुनौती
वैश्विक अस्थिरता के बीच मंदी से जूझ रहे भदोही के कालीन उद्योग की समस्याओं का समाधान एकमा की नई टीम के लिए बड़ी चुनौती है। ...और पढ़ें

HighLights
वैश्विक अस्थिरता से जूझ रहे कालीन उद्योग को पटरी पर लाना।
संशोधित आयकर अधिनियम उद्यमियों के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या।
जूट व जीआई पंजीकृत निर्यातकों को दस प्रतिशत प्रोत्साहन राशि की मांग।
जागरण सवाददाता, भदोही। वैश्विक अस्थिरता के बीच मंदी के दौर से गुजर रहे कालीन उद्योग की समस्याओं का समाधान कर व्यवसाय को को पटरी पर लाना, निर्यातकों को राहत प्रदान करना अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) की नई टीम के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।
नवगठित एकमा के टीम की कमान इस बार उमेश गुप्ता मुन्ना को सौंपी गई है जो कालीन निर्यात संवर्धन परिषद में लगातार तीन बार प्रशासनिक समिति के सदस्य रह चुके हैं। उनके पास व्यावसायिक अनुभव के साथ किसी भी पटल पर उद्योग की समस्याओं को दमदारी से प्रस्तुत करने की क्षमता भी है।
हालांकि, मौजूदा चुनौतियों से जूझ रहे उद्योग को मुक्ति दिलाना आसान नहीं होगा। उद्योग की समस्याओं, सुझावों, जरूरतों और मांगों संबंधित पूर्व में भेजे गए पत्रों पर विचार होगा या नहीं यह भी निश्चित नहीं है। ऐसे में नए सिरे से सरकार के सामने अपनी बात रखना होगा।
विशेषकर संशोधित आयकर अधिनियम (43बी-एच) उद्यमियों के लिए इस समय सबसे बड़ी समस्या है। संशोधित अधिनियम कालीन उद्योग के लिए व्यावहारिक नहीं है। इसी तरह जूट निर्मित कालीन उत्पादों पर दस प्रतिशत प्रोत्साहन राशि की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
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जम्मू कश्मीर की तर्ज पर जीआइ पंजीकृत निर्यातकों को दस प्रतिशत प्रोत्साहन राशि की मांग की जा रही है। उम्मीद है कि नवगठित टीम नए सिरे से प्रस्ताव व मांग पत्र तैयार कर सरकार को प्रेषित करेगी।
बैठक कर लिया जाएगा निर्णय
इस समय उद्योग की सबसे बड़ी समस्या संशोधित आयकर अधिनियम है। इससे मुक्ति दिलाने, जीआइ के तहत कालीन उत्पादों की ब्रांडिग कराने सहित कई बिंदुओं पर सहयोग की जरूरत है। इस दिशा में केंद्र व प्रदेश सरकार के सामने मांग रखी जाएगी। जल्द ही अन्य पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों के साथ बैठक कर आगामी योजनाओं के संबंध में चर्चा की जाएगी।
-उमेश गुप्ता मुन्ना, एकमाध्यक्ष