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    बिजनौर से पलायन कर मादा गुलदार ने मुरादाबाद में जन्मे शावक

    By Ajeet Chaudhary Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Thu, 28 May 2026 04:29 PM (IST)

    मादा गुलदार अपने शावकों को नर गुलदारों से बचाने के लिए बिजनौर से मुरादाबाद जैसे इलाकों में पलायन कर रही हैं। इस स्वभाव के कारण गन्ने के खेतों में गुलद ...और पढ़ें

    (प्रतीकात्मक फोटो)

    (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. मादा गुलदार शावकों को बचाने हेतु पलायन कर रही हैं।

    2. मुरादाबाद में मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हुई है।

    3. गन्ने के खेत गुलदारों के लिए नया ठिकाना बने।

    जागरण संवाददाता, बिजनौर। अपना कुनबा बचाने और बढ़ाने के लिए मादा गुलदार शावकों को व्यस्क गुलदारों के इलाकों से दूर ले जा रही हैं। मादा गुलदारों का ये स्वभाव मानव-वन्य जीव संघर्ष को और बढ़ा रहा है। इससे मुरादाबाद में भी गुलदारों के हमलों की घटनाएं बीते कुछ समय में बहुत बढ़ गई हैं। ऐसा तब हुआ है जबकि मुरादाबाद में कोई वन क्षेत्र भी नहीं है। गन्ने के खेतों में गुलदारों को शिकार मिल रहा है। खेतों में गन्ने की छिपने लायक फसल न होने के कारण मनुष्यों पर भी उनके हमले बढ़ रहे हैं।

    खेतों में गुलदारों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 के चार महीने अभी पूरे भी नहीं हुए हैं कि अब तक 18 गुलदार जिले में पकड़े जा चुके हैं। शायद ही कोई गांव हो जहां पर गुलदार का ठिकाना न हो। गुलदार खेतों में हैं तो वे शावकों को भी जन्म देंगे। खेतों में शिकार कम होने या छिपने के लिए गन्ने की फसल न होने पर गुलदार मनुष्यों पर हमला करने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

    गुलदारों के हमले में बीते तीन वर्ष में जिले में 36 मनुष्यों की जान जा चुकी है। बिजनौर में गुलदारों द्वारा लोगों की जान लेने का मुद्दा विधानसभा से लेकर संसद तक में उठ चुका है। जिले के लोग गुलदार के हमलों से जूझ रहे थे लेकिन अब मुरादाबाद में भी इनके हमलों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह तब हो रहा है जबकि वहां कोई वन क्षेत्र भी नहीं है। माना जा रहा है कि मुरादाबाद व आसपास के जिलों में बिजनौर से ही गुलदार गए हैं। सबसे खास बात है कि नर गुलदार के मुकाबले मादा गुलदारों ने जिले के बाहर अधिक पलायन किया है।

    इस कारण पलायन कर रहीं मादा गुलदार
    मादा गुलदार एक बार में दो से चार शावकों को जन्म देती है। शिकार की प्रतिस्पर्धा को कम करने और मादा के साथ सहवास करने के लिए नर गुलदार इन शावकों को मार देते हैं। मादा गुलदार इसलिए नर गुलदार के इलाके से दूर जाकर शावकों को जन्म देती है। जिले के एक ओर गंगा है तो उसके पार गुलदार नहीं गए। वे जिले से सटे मुरादाबाद जिले की ओर शिफ्ट हो गए। वहां इस साल में पांच गुलदार पकड़े गए हैं और दो हादसों में मारे गए। इससे पहले वर्ष 2006 के बाद कोई गुलदार वर्ष 2018 में पकड़ा गया था।

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    इतने हुए हैं हमले
    मुरादाबाद में इस वर्ष में पांच गुलदार पकड़े गए हैं जबकि दो मरे हैं। गुलदारों के लोगों पर हमले लगातार जारी हैं। बिजनौर में में भी अब तक 33 गुलदार पकड़े जा चुके हैं। इस साल गुलदार के हमले में एक बालिका व एक महिला की मौत हो चुकी है।

    मुरादाबाद में भी हमले बढ़े हैं
    बिजनौर के बाद मुरादाबाद में भी हमले बढ़े हैं। मादा गुलदार अपने शावकों को बचाने के स्वभाव के कारण नर गुलदार के इलाकों से दूर जाती है। इसी वजह से आसपास भी गुलदार देखे जाने के मामले बढ़े हैं।
    -पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक- मुरादाबाद मंडल

    संख्या काफी बढ़ गई है
    कोरोना के समय वन्यजीवों का सड़कों पर एकदम फ्री मूवमेंट हुआ। उस समय सड़कों पर वन जैसा ही सन्नाटा था। उस समय ही मुरादाबाद में काफी गुलदार आए होंगे। अब इनकी संख्या काफी बढ़ गई है।
    अविनाश पांडेय, डीएफओ मुरादाबाद