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    गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे : बिजनौर में भूमि चिह्निकरण शुरू, 750 किमी लंबा मार्ग बदलेगा यूपी की तस्वीर

    By Rahul Shyam Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Thu, 28 May 2026 12:54 PM (IST)

    गोरखपुर से शामली के बीच प्रस्तावित 750 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि चिह्निकरण का कार्य बिजनौर के स्योहारा क्षेत्र में शुरू हो गया ...और पढ़ें

    स्योहारा के गांव निचलपुर में गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे के लिए खेत में सीमेंटेड पोल लगाते कर्मचारी। जागरण

    स्योहारा के गांव निचलपुर में गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे के लिए खेत में सीमेंटेड पोल लगाते कर्मचारी। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि चिह्निकरण शुरू।

    2. बिजनौर के स्योहारा क्षेत्र में कार्य प्रगति पर।

    3. 750 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे 2030 तक पूरा होगा।

    संवाद सूत्र, स्योहारा (बिजनौर)। गोरखपुर से शामली के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि चिह्निकरण का कार्य शुरू हो गया है। स्योहारा क्षेत्र के गांव निचलपुर व मिलक में अलग-अलग स्थानों पर खेतों में सीमेंटेड पोल लगाकर भूमि को चिन्हित किया जा रहा है। एक्सप्रेस-वे में स्योहारा क्षेत्र के 20 गांव आ रहे हैं।

    एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए चिह्निकरण किया जा रहा है। बुधवार को स्योहारा के गांव निचलपुर व मिलक के कुछ स्थानों पर खेतों के बीच सीमेंटेड पोल लगाए गए। एनएचएआई की ओर से ऐसे गांवों को चिन्हित कर अब गांवों में उन खेतों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां से एक्सप्रेस-वे गुजरना है। इस कार्य के लिए टीम स्योहारा क्षेत्र के निचलपुर और मिलक गांव पहुंची, जहां खेतों में सीमेंटेड पोल लगाकर प्रस्तावित मार्ग की निशानदेही और नापजोख की गई।

    फिलहाल इन गांवों में ही चिन्हिकरण कार्य किया जा रहा है। निचलपुर व मिलक में ही तीन से चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ भूमि चिन्हित करने का कार्य अलग-अलग टीमों द्वारा किया जा रहा है। यह टीमें यहां खेतों में खुदाई करके सीमेंटेड पोल लगा रही हैं। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे लगभग 750 किलोमीटर लंबाई और 150 मीटर चौड़ाई का प्रस्तावित है।

    यह पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा, जो बिजनौर क्षेत्र से भी गुजरेगा। बिजनौर की तहसील धामपुर के थाना स्योहारा समेत धामपुर व नहटौर के कुछ गांव भी इसमें शामिल हैं। इस परियोजना के वर्ष 2030 तक पूरा होने की संभावना है। टीम के गांवों में पहुंचने के बाद निचलपुर, मिलक सहित आसपास के क्षेत्रों में इस परियोजना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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