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    बुलंदशहर में खूंखार कुत्ते हर घंटे 12 लोगों को कर रहे घायल, एक साल में रेबीज से पांच की मौत

    By Jagmohan Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Mon, 06 Jul 2026 06:34 AM (IST)

    Bulandshahr News: बुलंदशहर में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जहां हर घंटे औसतन 12 लोग काटे जा रहे हैं और पिछले एक साल में रेबीज से पांच लोगों की मौत हो ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक फोटो

    प्रतीकात्‍मक फोटो

    HighLights

    1. जिला अस्पताल में एआरवी लगवाने के लिए लग रही कतार।

    2. स्वास्थ्य विभाग एआरवी पर प्रतिमाह 28 लाख रुपये कर रहा खर्च।

    जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। जिले में शहर से देहात तक खूंखार कुत्तों की दहशत बढ़ती जा रही है। एक दिन में औसतन 300 से ज्यादा लोगों को आवारा और पालतू कुत्ते के काटते हैं। हर घंटे औसतन 12 लोगों को कुत्ते लहूलुहान कर रहे हैं।

    कई क्षेत्रों में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़कों पर निकलना जोखिम भरा हो गया है। पिछले दो साल में पांच लोगों की रेबीज के चलते जान चली गई। कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल में दिन निकलते ही एआरवी लगवाने वालों की कतार लग जाती है।

    स्वास्थ्य विभाग में जिला अस्पताल, 13 सीएचसी और पांच ब्लाक स्तरीय पीएचसी समेत 92 स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन लगाई जाती है। इसमें कुत्ते समेत अन्य जानवरों के काटने के लगभग 12 हजार घायलों को मुफ्त में एआरवी (एंटी रेबीज वैक्सीन) लगाई जाती है।

    इसमें आवारा और पालतू कुत्ते, बंदर, बिल्ली, नेवला, गीदड़, गधा और घोड़ा आदि जानवरों के काटे मरीज होते हैं। इनमें पालतू और आवारा कुत्ते काटे के लगभग 7500 मरीज होते हैं, जिसमें पालतू कुत्ते के काटने से घायल 1500 मरीज और आवारा कुत्ते के दांत लगने वाले लगभग छह हजार मरीज होते हैं।

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    कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल की ओपीडी में कुत्ता काटने वाले मरीज सुबह आठ बजे ही पहुंचना शुरू हो जाते हैं। दोपहर दो बजे ओपीडी समाप्त होने तक मरीज पहुंचते रहते हैं। वर्तमान में 190 से 240 मरीजों को एआरवी लगती है। इसमें औसतन 180 से 190 मरीज पहली डोज लगवाने होते हैं।

    जिन मरीजों के ज्यादा जख्म होता है। उनको एआरएस (एंटी रेबीज सीरम) लगाई जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्वयं मानते हैं कि यह एक गंभीर समस्या है, क्योंकि एआरवी, एआरएस पर वैक्सीन, सिरिंज और स्टाफ के वेतन समेत प्रतिमाह लगभग 28 लाख रुपए खर्च होते हैं।

    जिला सर्विलांस अधिकारी डा. रमित सिंह का कहना है कि कोई भी जानवर काटे तुरंत एआरवी लगवाएं। समय से एआरवी लगती है तो रेबीज का खतरा न के बराबर रह जाता है।

    एक साल में पांच लोगों की मौत

    बुलंदशहर। जिले में शहर से देहात तक आवारा कुत्तों का आतंक है। जिले में हर रोज चार सौ से अधिक लोगों को आवारा और पालतू कुत्ते काटते हैं। ये वो मरीज हैं जोकि कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज और सीएचसी व पीएचसी पर एआरवी लगवाते हैं। पिछले एक साल में कुत्ता काटने से फैले रेबीज से पांच लोगों की मौत हो चुकी है।

    सात अक्टूबर को ऊंचगांव क्षेत्र के अमरगढ़ गांव निवासी इलेक्ट्रीशियन 45 वर्षीय सरदार पुत्र गोपाल गांव में ही पागल कुत्ते ने काटा था। सरदार की उपचार के बाद दिल्ली में मौत हो गई थी। इसके अलावा डिबाई क्षेत्र में एक ग्रामीण की रेबीज से मौत हुई।

    खुर्जा में भी रेबीज से एक व्यक्ति की जान गई। इसी साल 23 मार्च को छतारी के राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी 24 वर्षीय ओम शर्मा की रेबीज से मौत हो गई थी। बुलंदशहर के आवास-विकास निवासी ओम शर्मा को मौत से लगभग एक माह पहले रोटी देते समय एक कुत्ते ने मंदिर के पास ही काट लिया था। इसके अलावा गुलावठी में भी कुत्ता काटने से एक व्यक्ति को रेबीज हो गया था। अब नीमखेड़ा गांव को तीस जून को राजेंद्र शर्मा की रेबीज से मौत हो गई।

    सीएमओ डा. सुनील कुमार दोहरे का कहना है कि लोग लापरवाही करते हैं। यही लापरवाही कई बार मौत का कारण बनती है। कुत्ता, बंदर या बिल्ली कोई भी जानवर काटे तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचकर एआरवी लगवाएं।