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    अब GNSS रोवर तकनीक से होगी जमीन की नपाई, राजस्व कार्यों में बढ़ेगी पारदर्शिता

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 07:23 PM (IST)

    चंदौली में अब भूमि की पैमाइश अत्याधुनिक जीएनएसएस रोवर तकनीक से की जाएगी, जिससे यह अधिक सटीक और पारदर्शी होगी। यह प्रणाली भूमि विवादों के समाधान में ते ...और पढ़ें

    अब जीएनएसएस रोवर से होगी जमीन की नपाई।

    अब जीएनएसएस रोवर से होगी जमीन की नपाई।

    HighLights

    1. भूमि की पैमाइश अब जीएनएसएस रोवर तकनीक से होगी।

    2. यह तकनीक भूमि मापन को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएगी।

    3. सीमांकन विवादों का तेजी से समाधान होगा, दक्षता बढ़ेगी।

    जागरण संवाददाता, चंदौली। अब भूमि की पैमाइश अत्याधुनिक जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) रोवर तकनीक से की जाएगी। राजस्व विभाग ने भूमि मापन व्यवस्था को अधिक सटीक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

    इस व्यवस्था के लिए सभी एसडीएम व तहसीलदारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। नायब तहसीलदार प्रशिक्षण ले रहें हैं। इसके बाद राजस्व निरीक्षक व लेखपाल प्रशिक्षण लेकर काम शुरू कर देंगे।

    नई प्रणाली लागू होने से खेत, आवासीय भूखंड और अन्य प्रकार की जमीन की पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीकता के साथ हो सकेगी। इससे सीमांकन संबंधी विवादों के समाधान में तेजी आने के साथ राजस्व कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

    क्या है जीएनएसएस रोवर

    जीएनएसएस रोवर उपग्रह आधारित आधुनिक तकनीक पर कार्य करता है। यह उपकरण सामान्य परिस्थितियों में लगभग दो से तीन सेंटीमीटर तक की सटीकता के साथ भूमि की पैमाइश करने में सक्षम है। इससे परंपरागत पैमाइश में होने वाली त्रुटियों में कमी आएगी और मौके पर वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा। नई तकनीक से तैयार होने वाला डाटा अधिक विश्वसनीय होगा, जिससे राजस्व अभिलेखों के अनुरूप सीमांकन करना आसान होगा।

    होंगे ये प्रमुख लाभ

    • भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी तथा अनावश्यक विवाद कम होंगे।
    • पैमाइश में कम समय लगेगा और राजस्व कार्यों की दक्षता बढ़ेगी।
    • डिजिटल अभिलेख अधिक सटीक तैयार होंगे, जिससे भविष्य में संदर्भ लेना आसान होगा।
    • किसानों, भू-स्वामियों, आम नागरिकों को भरोसेमंद व पारदर्शी राजस्व सेवाओं का लाभ मिलेगा।
    • राजस्व अभिलेखों और वास्तविक स्थिति के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा।
    • सरकारी योजनाओं व विकास कार्यों के लिए भूमि संबंधी जानकारी अधिक प्रमाणिक रूप में उपलब्ध हो सकेगी।

    जीएनएसएस रोवर तकनीक के प्रयोग से भूमि की पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीक और पारदर्शी होगी। इससे सीमांकन संबंधी विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी तथा राजस्व कार्यों में मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम होगी। शासन की मंशा के अनुरूप आधुनिक तकनीक के माध्यम से लोगों को बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। -विजय त्रिवेदी, उप जिलाधिकारी सदर।