चंदौली की महिला सपा नेता गार्गी सिंंह पटेल ने आत्मसम्मान का हवाला देकर पार्टी का साथ छोड़ा, मई में हुआ था घर में घुसकर हमला
चंदौली की महिला सपा नेता गार्गी सिंह पटेल ने आत्मसम्मान और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है ...और पढ़ें

चंदौली में सपा नेता गार्गी सिंह पटेल का इस्तीफा, आत्मसम्मान को बताया वजह।
HighLights
महिला सपा नेता गार्गी सिंह पटेल ने दिया इस्तीफा।
आत्मसम्मान और पार्टी की उपेक्षा को बताया कारण।
मई में हुए हमले के बाद नहीं मिला सहयोग।
जागरण संवाददाता पड़ाव (चंदौली)। यूपी में नए सिरे से बदलते सियासी समीकरणों के बीच जिले में ताजे घटनाक्रम में सपा नेता गार्गी सिंंह का इस्तीफा चर्चा में है। चुनाव की घोषणा को लगभग छह माह बचे हैं और पार्टी में आने जाने के समीकरणों के बीच गार्गी ने सपा पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए गार्गी सिंह पटेल ने एक विस्तृत पत्र लिखा है, जिस पर सपा की ओर से सोमवार को भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बताते चलें कि मई महीने में गार्गी सिंह पटेल पर उनके घर में घुसकर हमला किया गया था।
घर के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी उन्हें बाल पकड़कर घसीटते हुए दिखाई दिए थे। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस हमले में गार्गी सिंह के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं थी और उनके हाथ में फ्रैक्चर भी हुआ है।
अपने इस्तीफे में गार्गी पटेल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी दबाव, लालच या राजनीतिक सौदेबाजी का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान का निर्णय है। गार्गी का यह कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खबरें और भी
समाजवादी पार्टी की महिला सभा की जिलाध्यक्ष गर्गी सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और जिला अध्यक्ष (महिला सभा) के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा सोशल मीडिया पर देकर रविवार को सनसनी फैला दी थी। अपने इस्तीफे में उपेक्षा, आत्मसम्मान और कठिन समय में संगठन से अपेक्षित सहयोग न मिलने को निर्णय का प्रमुख कारण बताया है।
गर्गी सिंह ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि यह केवल एक औपचारिक इस्तीफा नहीं, बल्कि लंबे समय से मन में दबे दर्द, उपेक्षा और अनुत्तरित प्रश्नों की अभिव्यक्ति है। कहा कि पार्टी में केवल एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम किया और महिलाओं, बच्चियों, पिछड़े, कमजोर एवं वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया।
कहा कि जब भी किसी के साथ अन्याय हुआ, मैने पूरी निष्ठा और साहस के साथ उसकी आवाज उठाई तथा पार्टी की विचारधारा के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहीं। लेकिन जब स्वयं मेरे जीवन में कठिन परिस्थितियां आईं और उन्हें सुरक्षा, न्याय व राजनीतिक सहयोग की आवश्यकता थी, तब जिन लोगों से सबसे पहले साथ मिलने की उम्मीद थी, उनमें से कई लोग मौन रहे।
गर्गी सिंह ने अपने पत्र में सवाल उठाया कि यह मौन उनके लिए बेहद पीड़ादायक रहा और उन्होंने इसे आत्मसम्मान से जुड़ा विषय बताया। ऐसे माहौल में पद पर बने रहना मेरे लिए उचित नहीं रह गया था, इसलिए उन्होंने संगठन की सभी जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी छोड़ने का अर्थ जनसेवा या सामाजिक संघर्ष से पीछे हटना नहीं है। अन्याय, शोषण और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की लड़ाई पहले की तरह आगे भी जारी रहेगी। उनका संघर्ष किसी पद या पार्टी का निमित्त ही रहे यह आवश्यक नहीं है।