वायरल ठीक करने के लिए भी दे रहे एंटीबायोटिक दवाएं, लीवर व किडनी को कर रहा प्रभावित बेवजह सेवन
चित्रकूट में मेडिकल स्टोर और निजी चिकित्सक बिना जांच के एंटीबायोटिक दवाएं दे रहे हैं। इससे लीवर और किडनी पर बुरा असर पड़ रहा है, साथ ही एंटीबायोटिक रे ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मुख्यालय सहित पूरे जिले में संचालित अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पर पहुंचने वाले मरीजों को बिना जांच और चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं। झोलाछाप अधिक धन कमाने के चक्कर में मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं प्राथमिकता से लिख रहे हैं।
वहीं सरकारी अस्पतालों में भी मेडिकल स्टोर भेजे जाने वाले निजी पर्चों पर एंटीबायोटिक दवाएं अक्सर लिखी जाती हैं, जबकि सरकारी पर्चों में इन्हें लेकर अधिक सावधानी बरती जाती है।
एंटीबायोटिक के दुष्परिणामों से अनजान मरीज ऐसी दवाओं का सेवन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना आवश्यकता एंटीबायोटिक लेना सेहत के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि इनका सीधा असर लीवर और किडनी पर पड़ता है।
सीतापुर निवासी रामेंद्र कुमार पेशाब में जलन की समस्या और भौंरी निवासी शिवभवन पथरी की शिकायत को लेकर गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचे थे। उनके पर्चों में एंटीबायोटिक दवाएं लिखी गईं। एक को नाइट्रोफ्यूरेंटोइन और दूसरे को नॉरफ्लॉक्सासिन लेने की सलाह दी गई।
कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि असली खेल निजी पर्चों पर होता है। जरूरत न होने के बावजूद निजी चिकित्सक एंटीबायोटिक दवाएं लिख देते हैं।
यहां तक कि वायरल बुखार में भी एंटीबायोटिक दी जा रही हैं। इससे मरीज को तात्कालिक राहत तो मिल जाती है, लेकिन आगे चलकर गंभीर नुकसान होता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में संचालित 400 से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक की बिक्री हो रही है। प्रतिदिन लगभग 20 लाख रुपये से अधिक की एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री हो रही है।
कर्वी के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई मरीज बिना पर्चे के दवा और एंटीबायोटिक देने का दबाव बनाते हैं। मजबूरी में अन्य दवाओं के साथ एंटीबायोटिक भी देनी पड़ती है।
एंटीबायोटिक हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही लें। स्वयं मेडिकल स्टोर से दवाएं न खरीदें, क्योंकि बिना जरूरत भी एंटीबायोटिक थमा दी जाती है।
-डॉ. ऋषि कुमार, फिजीशियन संयुक्त जिला अस्पताल
एंटीबायोटिक उतने ही दिन लें, जितने दिन डॉक्टर सलाह दें। समय से पहले दवा छोड़ने पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ जाता है और भविष्य में अधिक शक्तिशाली दवाओं की जरूरत पड़ती है।
-डाॅ. प्रदीप जायसवाल, चिकित्सक
बिना विशेषज्ञ चिकित्सक के पर्चे के एंटीबायोटिक देना गैरकानूनी है। शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही दवाएं लें।
-डॉ. भूपेश द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी