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    चित्रकूट में व्यावसायिक गैस महंगी होने से खाने-पीने के दाम बढ़े, सिलिंडर संकट से शादियां भी प्रभावित

    Updated: Sat, 02 May 2026 05:25 PM (IST)

    चित्रकूट में व्यावसायिक गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से होटल और ठेले वालों ने खाने-पीने की चीजें महंगी कर दी हैं। सिलिंडर की कमी के कारण शादियों में भी लो ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. व्यावसायिक गैस के दाम बढ़ने से ठेले-होटल प्रभावित

    2. शादियों के लिए भी सिलिंडर के लिए भटक रहे लोग

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। शहर में व्यावसायिक गैस सिलिंडर के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी का असर अब सीधे आम लोगों की थाली पर दिखने लगा है। होटल, ढाबा और फास्ट फूड ठेला संचालकों ने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। गैस महंगी होने और समय पर उपलब्ध न होने से छोटे कारोबारियों की कमर टूटती नजर आ रही है।


    बस स्टैंड, धनुष चौराहा और रेलवे स्टेशन रोड पर पहले जहां फास्ट फूड ठेलों की कतारें लगी रहती थीं, अब वहां गिने-चुने ठेले ही नजर आ रहे हैं। कई ठेले संचालकों ने काम बंद कर दिया है या सीमित कर दिया है। पलक डोसा ठेला लगाने वाले नीरज कहते हैं, गैस इतनी महंगी हो गई है कि मजबूरी में हर आइटम पर पांच रुपये तक दाम बढ़ाने पड़े हैं, नहीं तो खर्च निकलना मुश्किल है। इसी तरह एक चाट कैलाश ने बताया, पहले दिनभर में अच्छा मुनाफा हो जाता था, अब ग्राहक भी कम हो गए हैं।

    महंगाई का असर सीधे बिक्री पर पड़ रहा है। होटल संचालक व होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच गैस के दाम बढ़ना बड़ा झटका है। अभी तो वह खाने-पीने के दाम नहीं बढ़ाए हैं अन्य विकल्प पर सोच रहे हैं पहले गैस दो हजार रुपये में मिल जाती थी अब करीब 32 सौ रुपये में हो गई है। यदि खर्च नहीं निकलेगा तो दाम बढ़ाना मजबूरी होगा।

    व्यापारियों में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है। व्यापारी नेता शानू गुप्ता का कहना है कि अगर जल्द दाम कम नहीं किए गए और आपूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। कुल मिलाकर, गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत और कमी ने शहर में महंगाई को और बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब और कारोबारियों की आमदनी पर पड़ रहा है।

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    केवल व्यापार ही नहीं, घरेलू जरूरतों और खासकर शादियों में भी सिलिंडर की किल्लत परेशानी बढ़ा रही है। लोग जिला पूर्ति कार्यालय और गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पहाड़ी निवासी रामलाल ने बताया कि बेटी की शादी सात मई को है, इसके लिए उन्होंने कई दिन पहले आवेदन किया था, लेकिन अब तक सिलिंडर नहीं मिल सका। उन्हें बार-बार अगले दिन आने को कहा जा रहा है। अब दाम भी अधिक लगेंगे।

    इसी तरह बंदरी निवासी फूलचंद्र वर्मा भी शादी के लिए सिलिंडर पाने को भटक रहे हैं। उनका कहना है, समय कम है, लेकिन कहीं से स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। शादी की तैयारी करें या सिलिंडर के लिए चक्कर लगाएं? जिलापूर्ति अधिकारी कमल नयन सिंह का कहना है कि जरूरतमंदों को समय पर सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।