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    चित्रकूट में नकली खाद का बड़ा खेल उजागर, डीएपी-यूरिया की बोरियों में भर रहे थे दूसरी खाद

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 05:18 PM (IST)

    चित्रकूट के मऊ में प्रशासन ने नकली डीएपी और यूरिया बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जहां भारी मात्रा में नकली खाद और पैकिंग सामग्री बरामद हुई। गो ...और पढ़ें

    खाद गोदाम में छापेमारी के दौरान प्रशासनिक के सामने खड़ा आरोपित संचालक श्यामू केसरवानी (बाएं)। प्रशासन

    खाद गोदाम में छापेमारी के दौरान प्रशासनिक के सामने खड़ा आरोपित संचालक श्यामू केसरवानी (बाएं)। प्रशासन  

    HighLights

    1. चार साल बाद फिर बेनकाब नकली खाद का खेल, डीएपी की बोरियों में दूसरी खाद भरकर हो रही थी पैकिंग

    2. गोदाम से 400 बोरी डीएपी, 3500 बोरी यूरिया समेत भारी मात्रा में सामग्री बरामद, हिरासत में संचालत व मुकदमे की तैयारी

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। खरीफ सीजन में खाद के लिए परेशान किसानों के साथ धोखाधड़ी के बड़े खेल का गुरुवार को प्रशासन ने भंडाफोड़ कर दिया। उपजिलाधिकारी मऊ रामऋषि रमन और जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा की संयुक्त टीम ने सरौंधा स्थित श्यामू खाद एवं बीज भंडार के गोदाम पर छापेमारी कर नकली डीएपी और यूरिया की पैकिंग के कथित कारोबार का खुलासा किया।

    जांच में दूसरी कंपनी की खाद को डीएपी और यूरिया की बोरियों में भरकर बाजार में बेचने की तैयारी मिली। भारी मात्रा में खाद, खाली बोरियां और पैकिंग सामग्री मिलने पर प्रशासन ने पूरे गोदाम को सील कर दिया और संचालक को हिरासत में ले लिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार वर्ष पहले इसी तरह के मामले में पकड़े जाने और जेल जाने के बाद भी संबंधित संचालक की फर्म दोबारा कैसे संचालित होती रही।


    छापेमारी के दौरान टीम को गोदाम में करीब 400 बोरी डीएपी, 3500 बोरी यूरिया, 550 बोरी रामगंगा खाद, दो क्विंटल जिंक, 680 किलोग्राम सल्फर, 15 बोरी ग्लो प्लस, 189 खाली रामगंगा बोरियां, 104 भारत प्रोम बोरियां तथा लगभग 1000 नई डीएपी की खाली बोरियां मिलीं। प्राथमिक जांच में सामने आया कि रामगंगा व अन्य ब्रांड की खाद को डीएपी और यूरिया की बोरियों में भरकर सील लगाया जाता था और किसानों को असली उर्वरक बताकर बेचा जाता था।

    जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा ने बताया कि प्रशासनिक टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही आरोपित श्यामू केसरवानी पैकिंग मशीन गोदाम से हटवा चुका था। इतना ही नहीं, कथित रूप से तैयार कई बोरियां गोदाम के पीछे नाले में फेंक दी गई थीं। प्रशासन ने मजदूर लगाकर उन बोरियों को भी बाहर निकलवाया। गोदाम से लिए गए उर्वरकों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

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    रिपोर्ट आने और जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद उर्वरक नियंत्रण आदेश समेत अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि जिले में नकली खाद के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन में नकली खाद के इस कथित नेटवर्क के सामने आने से किसानों में चिंता बढ़ गई है।

    चार साल पहले भी पकड़ी गई थी नकली खाद की फैक्ट्री

    नवंबर 2021 में मऊ पुलिस और कृषि विभाग ने सरौंधा गांव में छापेमारी कर नकली खाद बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। उस समय भी संचालन का आरोप श्यामू केसरवानी पर लगा था। कार्रवाई के दौरान इफ्को ब्रांड की करीब 300 बोरियों में भरी संदिग्ध डीएपी, एनपीके और एसएसपी खाद, पैकिंग मशीन, सिलाई मशीन तथा अन्य उपकरण बरामद हुए थे। श्यामू केसरवानी सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया गया था, जबकि दो नाबालिगों को बाद में छोड़ दिया गया था।

    जांच में सामने आया था कि प्रिंट कराई गई खाली बोरियों में नकली खाद भरकर उसे असली ब्रांड के नाम पर बेचा जा रहा था। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब संचालक पहले इसी तरह के मामले में जेल जा चुका था, तो उसकी फर्म दोबारा कैसे संचालित होने लगी और लाइसेंस कैसे बहाल हुआ। इस पर जिला कृषि अधिकारी आरके वर्मा ने कहा कि पुरानी फाइल निकलवाकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण में किसी स्तर पर लापरवाही मिली तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।