चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास की चुनौती
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, जिससे बाढ़ की मुसीबतें बनी हुई ...और पढ़ें

24 घंटे बाद भी खतरे के निशान से ऊपर मंदाकिनी। जागरण
HighLights
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही
प्रशासन के सामने राहत, बिजली, पानी, पुनर्वास की चुनौती
सड़कें, पुल क्षतिग्रस्त; बाढ़ के बाद संक्रमण का खतरा
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मंदाकिनी का रौद्र रूप भले ही थम गया हो, लेकिन बाढ़ की मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई है। शनिवार को 135.200 मीटर के रिकार्ड स्तर तक पहुंची नदी रविवार को सुबह सात बजे भी खतरे के निशान 126.500 से करीब 1.20 मीटर ऊपर बहती रही।
पानी उतरने के साथ रामघाट और आसपास के इलाकों में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है, मगर पीछे छूटी तबाही ने प्रशासन के सामने राहत, बिजली, पेयजल, खाद्य सामग्री और सुरक्षित वापसी की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
रामघाट में सड़क से पानी सिमटने लगा तो दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों की सफाई शुरू कर दी। टैंपो स्टैंड और रत्नावली मार्ग को नगर पालिका कर्मचारियों ने रात में ही धोकर साफ कराया। घरों और मठ-मंदिरों से भी पानी निकलने के बाद प्रशासन ने तलाशी अभियान शुरू किया है, ताकि बाढ़ के दौरान किसी व्यक्ति के फंसे रहने या अनहोनी की जानकारी सामने न आए।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति अब भी बाधित है। इससे पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। कई परिवारों के घरों में पानी और कीचड़ भरने से घरेलू सामान बर्बाद हो गया है। बाढ़ में जरूरी सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोगों के सामने अब भोजन, पीने का पानी और रहने की व्यवस्था का संकट है। प्रशासन के लिए राहत सामग्री को प्रभावित परिवारों तक पहुंचाना प्राथमिकता बना हुआ है।

तीन प्रमुख मार्ग अब भी बाधित
बाढ़ का असर सड़क संपर्क पर भी बना हुआ है। झांसी-मीरजापुर हाईवे पर शनिवार रात करीब 10 बजे आवागमन शुरू हो गया, लेकिन चित्रकूट-सतना और मानिकपुर-सतना मार्ग कई स्थानों पर कटान और रपटा-पुलिया बहने के कारण अब भी प्रभावित हैं। हनुमानधारा मार्ग का पुल बहने और मोहकमगढ़ व तरौंहा पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन की मुश्किल और बढ़ गई है।

प्रशासन के सामने दूसरी चुनौती
बाढ़ का पानी उतरने के बाद सबसे बड़ी चिंता संक्रमण और बीमारियों की है। घरों, गलियों और दुकानों में जमा कीचड़, गंदा पानी और मलबा हटाने के साथ पेयजल स्रोतों की सफाई जरूरी होगी। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित घर लौटाने से पहले क्षतिग्रस्त मकानों और रास्तों की स्थिति भी देखनी होगी।
जिले में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी समेत आपदा प्रबंधन की 15 टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हैं। अब रेस्क्यू के बाद प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें दोबारा सामान्य जीवन में लौटाने की चुनौती है।

रिकार्ड बाढ़ छोड़ गई तबाही के निशान
शनिवार को मंदाकिनी का जलस्तर 135.200 मीटर पहुंचा, जो वर्ष 2003 के 134.500 मीटर के हाई फ्लड लेवल से 70 सेंटीमीटर अधिक था। जबकि खतरे के निशान से 8.70 मीटर ऊपर थी। रामघाट से लेकर आसपास की बस्तियों और धार्मिक स्थलों तक पानी पहुंच गया था। कई सड़कें जलमग्न हुईं और पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचा। अब पानी उतरने के साथ तबाही के निशान सामने आने लगे हैं।
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मध्य प्रदेश में भी राहत की चुनौती
मध्य प्रदेश क्षेत्र में भी कई स्थानों पर पानी उतरने की प्रक्रिया जारी है। हनुमानधारा मार्ग का पुल बहने से यूपी-एमपी संपर्क प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने शनिवार रात रीवा में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की थी। राहत कार्य के लिए सेना के हेलीकाप्टर भी भेजे गए हैं। आज वह चित्रकूट का हवाई सर्वे कर सकते हैं।
