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    Jagannath Rath Yatra: कामदगिरि की तपोभूमि में अनोखा जगदीश मंदिर, 1835 से विराजमान हैं भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 12:55 AM (IST)

    चित्रकूट में कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर स्थित 1835 में निर्मित जगदीश मंदिर अपनी 190 वर्ष पुरानी चंदन की मूल प्रतिमाओं और वार्षिक रथयात्रा के लिए प्रसि ...और पढ़ें

    जगदीश मंदिर में विराजमान 190 साल पुरानी भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की चंदन की प्रतिमा। जागरण

    जगदीश मंदिर में विराजमान 190 साल पुरानी भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की चंदन की प्रतिमा। जागरण  

    HighLights

    1. कामदगिरि पर 1835 में पन्ना नरेश ने बनवाया जगदीश मंदिर।

    2. मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की मूल प्रतिमाएं विराजमान।

    3. चित्रकूट में दो ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्राएं, आस्था का केंद्र।

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। कामदगिरि परिक्रमा मार्ग केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिरों की जीवंत विरासत भी समेटे हुए है। इन्हीं में लगभग 190 वर्ष पुराना जगदीश मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विशेषताओं के कारण अलग पहचान रखता है। वर्ष 1835 में पन्ना नरेश द्वारा निर्मित इस मंदिर में चंदन की लकड़ी से बनी भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूल प्रतिमाएं आज भी उसी स्वरूप में विराजमान हैं, जिनकी स्थापना मंदिर निर्माण के समय की गई थी।

    कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के अंतिम छोर पर बिहारी चौक से पहले स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है। परिक्रमा करने वाले अधिकांश श्रद्धालु यहां दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं। मंदिर के वर्तमान महंत श्रीनारायण बताते हैं कि स्थापना के समय महंत माधवदास को मंदिर की सेवा-पूजा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब से लेकर आज तक परंपरा निरंतर चली आ रही है और भगवान की मूल प्रतिमाओं को कभी परिवर्तित नहीं किया गया।

    मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां से निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा है। इस पारंपरिक रथयात्रा में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा से रथ खींचने पर भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


    गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डा. रामनारायण त्रिपाठी कहते हैं कि कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर लगभग 500 छोटे-बड़े मंदिर हैं, लेकिन चंदन की प्राचीन प्रतिमाओं, ऐतिहासिक विरासत और निरंतर चली आ रही परंपराओं के कारण जगदीश मंदिर का स्थान विशिष्ट माना जाता है। यही कारण है कि चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था, इतिहास और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम बन चुका है।

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    आज से निकलेगी नौ दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा, रथ खींचने को उमड़ेगी आस्था

    भगवान जगन्नाथ की नौ दिवसीय पारंपरिक रथ यात्रा गुरुवार से कर्वी नगर के तरौंहा मोहल्ला स्थित जयदेव दास अखाड़ा परिसर से शुरू होगी। करीब 110 वर्ष पुरानी इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा विभिन्न मोहल्लों से होते हुए सोनेपुर गांव पहुंचेगी, जहां मेले का आयोजन होगा। इसके बाद नौवें दिन रथ वापस लौटेगा। करीब ढाई किलोमीटर की इस यात्रा को स्थानीय लोग ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ के नाम से जानते हैं।

    मंदिर के महंत रमाशंकर महाराज ने बताया कि भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है और यह यात्रा उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं का प्रतीक है। ओड़िशा के जगन्नाथपुरी की तर्ज पर निकलने वाली इस यात्रा में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं में रथ खींचने को लेकर खासा उत्साह है।

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