देवरिया में आधार-खतौनी की गड़बड़ी से 1.07 लाख किसानों की फार्मर आईडी अटकी, योजनाओं का लाभ मुश्किल
देवरिया में 1.07 लाख किसानों की फार्मर आईडी आधार-खतौनी में नाम की गड़बड़ी और अंश निर्धारण न होने के कारण अटकी हुई है। इससे उन्हें भविष्य में किसान सम् ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
देवरिया में 1.07 लाख किसानों की फार्मर आईडी लंबित।
आधार-खतौनी में नाम की गड़बड़ी प्रमुख बाधा बनी।
सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते किसान।
जागरण संवाददाता, देवरिया। जिले में किसानों की फार्मर आईडी बनाने का अभियान अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद करीब 1.07 लाख किसान अब भी इससे वंचित हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह आधार कार्ड और खतौनी में नाम का अलग-अलग दर्ज होना तथा तहसील स्तर पर अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी न होना है। इससे किसानों को भविष्य में किसान सम्मान निधि, खाद-बीज समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है।
जिले के 5,36,854 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए 1915 गांवों में कई बार विशेष शिविर लगाए गए। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक 4.29,512 किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है, लेकिन करीब 1.07 लाख किसानों का पंजीकरण अभी अधूरा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में किसानों के आधार कार्ड और खतौनी में नाम या अन्य विवरण अलग-अलग होने से सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
कई मामलों में तहसीलों से अंश निर्धारण लंबित होने के कारण भी फार्मर आईडी जारी नहीं हो सकी है। कुछ किसान रोजगार के सिलसिले में बाहर होने के कारण भी पंजीकरण नहीं करा पाए हैं।फार्मर आईडी बनाने में लापरवाही को लेकर पहले कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो सका है।
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कृषि विभाग का कहना है कि शासन से निर्देश मिलने पर गांव-गांव फिर से विशेष शिविर लगाकर शेष किसानों की फार्मर आईडी बनाई जाएगी। साथ ही जो किसान वर्तमान में आवेदन कर रहे हैं, उनका पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, ताकि वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।
फार्मर आईडी नहीं तो योजनाओं का लाभ मुश्किल
फार्मर आईडी भविष्य में किसान सम्मान निधि, सरकारी गोदामों से खाद-बीज वितरण समेत कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बनती जा रही है। ऐसे में जिन किसानों की आईडी नहीं बन पा रही है, उन्हें जल्द से जल्द आधार और खतौनी के विवरण में सुधार कराने की सलाह दी जा रही है।
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फार्मर रजिस्ट्री के लिए गांवों में कर्मचारी पहुंच रहे हैं। जो लोग गांव में नहीं है उन्हीं का अधिकांश फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सका है। इसके लिए किसानों से मोबाइल पर कर्मचारी संपर्क कर फार्मर रजिस्ट्री करा रहे हैं।
-सुभाष मौर्य उप कृषि निदेशक देवरिया।