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    देवरिया-सलेमपुर बाईपास मुआवजा: हाई कोर्ट ने रद किया अवार्ड, नए सिरे से सुनवाई का आदेश

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 01:01 PM (IST)

    हाई कोर्ट ने देवरिया और सलेमपुर बाईपास से प्रभावित किसानों की नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुआवजा अवार्ड रद कर दिया है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनिय ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने बाईपास किसानों का मुआवजा अवार्ड रद्द किया।

    2. राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3जी (3) के तहत नई सुनवाई।

    3. किसानों को दावा प्रस्तुत करने का नया अवसर मिलेगा।

    जागरण संवाददाता, देवरिया। देवरिया व सलेमपुर बाईपास से प्रभावित किसानों की नौ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मुआवजा अवार्ड निरस्त कर दिया है। इसके बाद अब राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3जी (3) के तहत नए सिरे से सुनवाई होगी। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि भूमि का पूरा विवरण प्रकाशित करते हुए दो स्थानीय समाचार पत्रों में नई सार्वजनिक सूचना जारी की जाए तथा याचिकाकर्ताओं को दावा प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।

    पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से दो माह के भीतर पूरी करनी होगी। प्रशासन का कहना है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद ही न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

    याचिकाकर्ता किसानों का कहना है कि देवरिया और सलेमपुर बाईपास के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (प्रभावी 2014) के प्रविधानों के अनुसार निर्धारित नहीं किया गया। साथ ही स्टांप शुल्क के नाम पर की जा रही कटौती भी नियमसंगत नहीं है।

    86 प्रतिशत मुआवजा हो चुका है वितरित
    देवरिया बाईपास की लंबाई 21.9 किलोमीटर है। इसके लिए 89.9058 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। इसकी कुल लागत 1734 करोड़ है। बाईपास बैतालपुर के सिरजम खास से मुंडेरा बुजुर्ग (सोनूघाट) के आगे फोरलेन से जुड़ेगा। इसके सक्षम प्राधिकारी एडीएम (प्रशासन) प्रेम नारायण सिंह हैं। परियोजना में 32 गांवों के 6450 किसानों को करोड़ 429 करोड़ यानी लगभग 88 प्रतिशत मुआवजा का वितरण किया जा चुका है।

    परियोजना के तहत अहिलवार के सामने रेल ओवरब्रिज समेत पुल और पुलियों का निर्माण जारी है। पहले 31 जुलाई 2027 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के चलते इसमें करीब डेढ़ वर्ष की देरी होने की संभावना है। इस परियोजना से प्रभावित बरारी, गौरा, भीमपुर, घटैलागाजी और चकरवा घूस गांवों के लगभग 37 किसानों ने अलग-अलग छह याचिकाएं दाखिल की थीं।

    सलेमपुर बाईपास के 41 किसानों ने दायर की थीं तीन याचिकाएं
    सलेमपुर बाईपास की लंबाई 14.7 किलोमीटर है। इसके लिए 69.2889 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। बाईपास का निर्माण महदहां चौराहे से अहिरौली तक 17 राजस्व गांवों से होकर किया जा रहा है। इसकी कुल लागत 1348 करोड़ है। परियोजना की कुल मुआवजा राशि 270 करोड़ है, जिसमें 230.85 करोड़ यानी लगभग 86 प्रतिशत का भुगतान किया जा चुका है।

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    इसके सक्षम प्राधिकारी मुख्य राजस्व अधिकारी हैं। भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देने की मांग को लेकर सिसवा पांडेय, चकबंदी उर्फ बिगही और कौड़िया जयराम गांवों के करीब 41 किसानों ने तीन याचिकाएं हाई कोर्ट में दाखिल की थीं।

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    देवरिया बाईपास के लिए हमारी जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून 2014 के अनुसार मुआवजा निर्धारित नहीं किया गया। स्टांप शुल्क के नाम पर की जा रही कटौती भी नियमों के विपरीत है। किसानों को उनका वैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। -धनंजय मणि त्रिपाठी, याचिकाकर्ता किसान

    किसान शुरू से ही कानून के अनुरूप मुआवजा देने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने हमारी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया। अंततः न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हमें उम्मीद है कि अब कानून के अनुसार मुआवजा मिलेगा। -अजीत त्रिपाठी, याचिकाकर्ता किसान

    हाई कोर्ट के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि प्रभावित किसानों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत पूरा अवसर नहीं दिया गया। यही कारण है कि मुआवजा अवार्ड निरस्त हुआ। अब निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाकर किसानों का पक्ष सुना जाना चाहिए। -विश्वनाथ मणि, याचिकाकर्ता किसान

    किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ, इसलिए हमें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मुआवजा तय करते समय स्टांप शुल्क के नाम पर की गई कटौती अनुचित है। हम केवल कानून के अनुसार उचित मुआवजा चाहते हैं। -शोभा देवी, याचिकाकर्ता किसान

    हमारी मांग शुरू से यही रही है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप हो। यदि किसानों को समय पर आपत्ति दर्ज कराने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता, तो न्यायालय जाने की नौबत नहीं आती। -मैनेजर शाह, याचिकाकर्ता किसान

    अभी हाई कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। जो भी दिशा निर्देश कोर्ट के होंगे, उसका अनुपालन कराते हुए नियमानुसार मुआवजा तय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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    - वीके सिंह, सीआरओ, सक्षम प्राधिकारी, सलेमपुर बाईपास।