देवरिया में झोपड़ी में सिमटी जिंदगी, सरकारी योजनाओं से अब तक वंचित है परिवार
देवरिया में मानसिक रूप से बीमार पति और चार बच्चों के साथ एक टूटी झोपड़ी में दयनीय जीवन जी रही हैं। यह परिवार प्रधानमंत्री आवास, शौचालय और हेल्थ कार्ड ...और पढ़ें

सरकारी योजनाओं से अब तक वंचित है परिवार।

समय कम है?
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संवाद सूत्र, पथरदेवा। विकास खंड के महुअवा खुर्द गांव में एक परिवार की दर्दभरी कहानी समाज व व्यवस्था से सवाल पूछ रही है। गांव की रहने वाली रजनति देवी मानसिक रूप से बीमार पति बिट्टू यादव व चार बच्चों के साथ टूटी-फूटी झोपड़ी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।सरकारी सहयोग की बात करें तो आज तक इस परिवार को न तो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिला, न शौचालय की सुविधा व हेल्थ कार्ड।
राशन कार्ड जरूर बना है, लेकिन वह अंत्योदय की बजाय पात्र गृहस्थी श्रेणी का है। इतना ही नहीं, उसमें परिवार के छह सदस्यों के स्थान पर केवल तीन का ही नाम दर्ज है। कभी मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले बिट्टू यादव की मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी रजनति देवी के कंधों पर आ गई है।
बरसात में झोपड़ी टपकती है, जबकि सर्दी और गर्मी में हालात और भी कठिन हो जाते हैं। रिश्तेदारों के सहयोग व बूढ़े पिता की मदद से किसी तरह शाम को बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था हो पाती है। कई बार परिवार को आधा पेट ही सोना पड़ता है।
आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार अत्यंत दयनीय स्थिति में है और अब तक योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल सका है।
परिवार के बारे में जानकारी नहीं है। सर्वे सूची व पात्रता की जांच कराते हुए जो भी संभव होगा, संबंधित लाभ शीघ्र दिलाने का प्रयास किया जाएगा। -दीपक कुमार, खंड विकास अधिकारी, पथरदेवा।