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    देवरिया में 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली जीत, पिपरा बिट्ठल में नहीं होगी चकबंदी

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 09:49 AM (IST)

    देवरिया के पिपरा बिट्ठल गांव में 12 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। हाईकोर्ट के आदेश से ग्रामीणों को बड़ी राहत म ...और पढ़ें

    पिपरा बिट्ठल मे जश्न मनाते ग्रामीण। जागरण

    पिपरा बिट्ठल मे जश्न मनाते ग्रामीण। जागरण

    HighLights

    1. पिपरा बिट्ठल गांव में 12 साल बाद चकबंदी प्रक्रिया रुकी।

    2. उच्च न्यायालय के आदेश से ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत।

    3. यह जीत गांव की एकजुटता और लंबे संघर्ष का परिणाम।

    संवाद सूत्र, भटनी, (देवरिया)। करीब 12 वर्षों तक जिला प्रशासन से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक चली कानूनी लड़ाई के बाद भटनी विकासखंड के ग्राम पंचायत पिपरा बिट्ठल के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद गांव में चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लग गई। निर्णय की सूचना मिलते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर, मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया और इसे गांव की एकजुटता, धैर्य और लंबे संघर्ष की जीत बताया।

    ग्रामीण वीरेंद्र गिरि और महिपाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में पिपरा बिट्ठल को चकबंदी के लिए चिन्हित किया गया था। गांव में कृषि योग्य भूमि पहले से ही सीमित है। दो तरफ नदी और एक ओर नाला होने से किसानों की काफी भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। वहीं, गांव में 75 चकरोड पहले से अभिलेखों में दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश पर अतिक्रमण है।

    इसका ग्रामीण शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। विरोध के बावजूद चकबंदी की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर ग्रामीणों ने पहले जिला स्तर पर गुहार लगाई। राहत नहीं मिलने पर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। वहां से मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और बाद में पुनः हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिलाधिकारी की निगरानी में एसडीएम, चकबंदी अधिकारी, क्षेत्राधिकारी और पुलिस बल की मौजूदगी में गांव में मतदान कराया गया।

    मतदान के दौरान 121 लोगों ने चकबंदी कराने और 100 लोगों ने चकबंदी नहीं कराने के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद जिलाधिकारी की आख्या और अन्य तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय दिया।

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    ग्रामीणों का दावा है कि प्रशासन की रिपोर्ट में अधिकांश ग्रामीण चकबंदी के विरोध में थे, जिसे न्यायालय ने महत्वपूर्ण आधार माना। गांव के आशीष सिंह विशेन ने कहा कि यह फैसला पूरे गांव के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इस अभियान में अशोक गिरि, छट्ठू यादव, हरिशंकर सिंह, धनंजय सिंह, पारसनाथ सिंह, शिव औतार सिंह, शंकर प्रसाद, रामपाल सिंह, राकेश सिंह, मिंटू सिंह समेत कई ग्रामीणों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

    ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य अजीत कुमार सिंह के सहयोग तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्योति मिश्र ''राका'' और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज गोस्वामी की प्रभावी पैरवी के प्रति भी आभार व्यक्त किया। निर्णय के बाद गांव में लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और विकास, सामाजिक सौहार्द एवं आपसी एकता बनाए रखने का संकल्प लिया।