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    देवरिया में गोताखोर की मौत पर बवाल, पुलिस से नोकझोंक के बाद नौकरी व मुआवजे के आश्वासन पर माने परिजन

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 02:36 PM (IST)

    देवरिया में गोताखोर सुरेंद्र साहनी का शव घर पहुंचते ही परिजनों व ग्रामीणों ने बरहज-गौरा मार्ग जाम कर दिया। वे दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, नौकरी और ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. गोताखोर सुरेंद्र साहनी की मौत पर देवरिया में प्रदर्शन

    2. परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया, मुआवजा मांगा

    3. प्रशासन ने पत्नी को नौकरी, बच्चों की शिक्षा का आश्वासन दिया

    जागरण संवाददाता, देवरिया। गोताखोर सुरेंद्र साहनी का शव पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम करीब छह बजे गौरा स्थित उनके आवास पहुंचते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। स्वजन व मोहल्ले के लोगों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने, नौकरी व मुआवजे की मांग को लेकर बरहज-गौरा मार्ग जाम कर दिया। इस दौरान शव हटाने को लेकर पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। करीब एक घंटे के मान-मनौव्वल के बाद स्वजन माने।

    यह है पूरा मामला

    उपनगर के गौरा के रहने वाले गोताखोर 45 वर्षीय सुरेंद्र साहनी की गुरुवार को सरयू नदी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। वह सोमवार को डूबे परसिया देवार के किसान धरमू प्रसाद की तलाश में लगे थे। मृत्यु के बाद स्वजन ने आरोप लगाया कि पुलिस सुरेंद्र को घर से पकड़कर ले गई थी और डूबने की सूचना समय से नहीं दी गई।

    शव घर पहुंचते ही पहले गौरा पुलिस चौकी के सामने रखने का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस ने वहां से हटा दिया। इसके बाद मोहन सेतु मोड़ पर शव रखकर सड़क जाम कर नारेबाजी शुरू कर दी।

    सूचना पर थानाध्यक्ष दिनेश मौर्य पुलिस बल के साथ पहुंचे और शव हटाने को कहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अड़े रहे। पुलिस ने सख्ती दिखाई व धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी, अपर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी राजेश चतुर्वेदी, तहसीलदार अरुण कुमार आदि अधिकारी समझाने बुझाने में लग गए।

    माहौल गर्म देखकर बरहज, भलुअनी, रुद्रपुर, मईल और खुखुंदू थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। प्रशासन ने स्वजन के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मृतक को पुलिस पकड़कर नहीं ले गई है। यह हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ है।

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    एसडीएम ने बताया कि मृतक की पत्नी को नगर पालिका में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दी जाएगी, दोनों बच्चों का नामांकन वाल्मीकि शिक्षा योजना के तहत कराया जाएगा तथा शासन की दुर्घटना हित लाभ योजना का लाभ भी दिया जाएगा।