आर्थिक तंगी को मात देकर दर्जी का बेटा बना दारोगा, कई सिपाहियों ने भी हासिल की सफलता
दर्जी के बेटे मनीष कुमार प्रजापति ने आर्थिक तंगी के बावजूद यूपी पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया। ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देवरिया। सिलाई की कमाई से घर का खर्च चलाने वाले दर्जी मास्टर पिता की आंखों में सपना था कि उनका बेटा मनीष पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे। आर्थिक तंगी कई बार राह में आई, लेकिन बेटे ने हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। आखिरकार मेहनत रंग लाई। बेटे ने उत्तर प्रदेश पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का मान बढ़ाया है।
परानछपरा गांव के रहने वाले मनीष कुमार प्रजापति के पिता रामछबीला प्रजापति गांव में सिलाई का काम करते हैं। सिलाई से होने वाली सीमित आय में ही परिवार का पालन-पोषण व बच्चों की पढ़ाई होती है। तीन भाइयों में सबसे बड़े मनीष ने बचपन से ही माता-पिता की मेहनत व संघर्ष को करीब से देखा। यही संघर्ष उनके लिए प्रेरणा बन गया।
वह कहते हैं कि सुविधाएं भले सीमित हैं, लेकिन आत्मविश्वास इससे कभी कम नहीं हुआ। नियमित पढ़ाई, अनुशासित दिनचर्या व लगातार अभ्यास ही सफलता का आधार बना है। उन्होंने ओबीसी वर्ग में 160वीं रैंक हासिल की। सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
पिता की वर्षों की मेहनत व मां कलावती देवी की सपना अब साकार हो गया है। गांव के लोगों ने मनीष को मिठाई खिलाकर बधाई दी। मनीष ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
खबरें और भी
बड़ी बहन बनी प्रेरणा, पहले सिपाही फिर दारोगा भर्ती में सफल हुआ भाई
मेहनत, अनुशासन व सही मार्गदर्शन से सफलता की राह आसान हो जाती है। इसका उदाहरण गाजीपुर निवासी प्रशांत कुशवाहा ने पेश किया है। बड़ी बहन की सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने पहले उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती व फिर दारोगा भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया।
गाजीपुर जनपद के शादियाबाद थाने के मोहनपुर कला गांव के रहने वाले प्रशांत कुशवाहा वर्तमान में जिले के श्रीरामपुर थाने में सिपाही के पद पर तैनात हैं। परिवार में सबसे पहले वर्ष 2021 में बड़ी बहन सुषमा का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर हुआ था। बड़ी बहन की मेहनत व समर्पण ने छोटे भाई प्रशांत को भी पुलिस सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशांत ने बहन के मार्गदर्शन में पढ़ाई की रणनीति बनाई। बहन ने उन्हें समय प्रबंधन, पाठ्यक्रम की तैयारी व परीक्षा की तकनीक समझाई। इसका परिणाम यह रहा कि प्रशांत ने वर्ष 2025 की उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की। प्रशिक्षण के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी व उत्तर प्रदेश पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। प्रशांत बताते हैं कि पिता देवनारायण कृषि कार्य करते हैं।
पिता किसान, बेटा बना दारोगा
किसान पिता के सिपाही बेटे संगम जायसवाल ने उत्तर प्रदेश पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। बनकटा थाने में वह सिपाही तैनात हैं।
सुल्तानपुर जिले के कुड़वार थाना क्षेत्र के अलीगंज बाजार के रहने वाले संगम जायसवाल बताते हैं कि बड़े भाई रोहित जायसवाल का मार्गदर्शन काम आया। वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा पास कर बड़े भाई सिपाही बने व इस समय गाजीपुर में तैनात हैं।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान लगातार मार्गदर्शन किया। पढ़ाई की रणनीति, समय प्रबंधन व नियमित अभ्यास का सुझाव दिया, जो काम आया है। पिता राजनारायण जायसवाल किसान हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। परिवार में पांच बहनें हैं व दो भाइयों में संगम सबसे छोटे हैं।
अनुपम ने नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई
श्रीरामपुर थाने में तैनात सिपाही अनुपम कुमार वर्ष 2025 में चयनित हुए थे। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान खाली समय का सदुपयोग पढ़ाई के लिए किया। अंबेडकर नगर जनपद की आलापुर तहसील के करौंदी लाला गांव वह रहने वाले हैं।
उन्होंने बताया कि खाली समय में नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, विषयों का लगातार अध्ययन किया व अनुशासित दिनचर्या अपनाई। इसी लगन, निरंतर अभ्यास व आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने दारोगा भर्ती परीक्षा में सफलता प्राप्त की। पिता योगेंद्र प्रसाद किसान हैं।