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    पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर भेजे गए जेल, जज के सामने फूट-फूटकर लगे रोने, बोले- हुजूर मेरी जान बचा लीजिए

    Updated: Thu, 11 Dec 2025 09:00 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश के देवरिया में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जेल भेज दिया गया। जज के सामने पेशी के दौरान अमिताभ ठाकुर फूट-फूटकर रोने लगे और अपनी जान बचाने ...और पढ़ें

    महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज की इमरजेंसी से स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाहर निकलते पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर। जागरण

    महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कालेज की इमरजेंसी से स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाहर निकलते पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर। जागरण

    HighLights

    1. पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को भेजा गया जेल

    2. देवरिया में जज के सामने फूट-फूटकर रोए

    3. अमिताभ ठाकुर ने जान बचाने की लगाई गुहार

    विधि संवाददाता, देवरिया। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर पुलिस अधीक्षक पद पर रहते हुए धोखाधड़ी से अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम जमीन हड़पने के आरोप में बुधवार को जेल भेज दिए गए। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंजू कुमारी की अदालत नें आरोपित को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया ।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से अपनी सफाई देते हुए अमिताभ ठाकुर फूट-फूट कर रोने लगे।

    सीजेएम के ढांढस बधाने पर कहे, हुजूर जेल में मेरी हत्या हो जाएगी, मुझे बचा लीजिए। मुझे 45 मिनट का समय दीजिए मैं अपनी पूरी बात आपको लिख कर देना चाहता हूं । पता नहीं कल जीवित बचूं या नहीं।

    लखनऊ जनपद के तालकटोरा थाना क्षेत्र स्थित आवास विकास कालोनी के रहने वाले संजय शर्मा ने 12 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव सहित अन्य उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया था की 1999 में अमिताभ ठाकुर पुलिस अधीक्षक देवरिया के पद पर रहते हुए छल से सरकारी संपत्ति हड़पने का अपराध किया है।

    अमिताभ ठाकुर ने शासकीय प्लाट अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम ले लिया उन्होंने विक्रय अभिलेख में अपनी पत्नी का नाम नूतन देवी और पति का नाम अजिताभ ठाकुर लिखवाया। बाद में उसे बड़ी रकम लेकर बेच दिया जबकि उक्त प्लाट को उन्हें बेचने का कोई अधिकार नहीं था। मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना कोतवाली देवरिया में अपराध संख्या 1021 /2025 पर दर्ज हुई। लेकिन विवेचना शासन के निर्देश पर एसआइटी लखनऊ को अंतरित हो गई।

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    कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपित को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरो्पित से पूछा कि क्या उन्हें विधिक सहायता के लिए अधिवक्ता चाहिए तो आरोपित ने कहा कि मैं खुद सक्षम हूं, मुझे कोई अधिवक्ता अभी नहीं चाहिए, फिर अदालत ने पूछा कि क्या आपको गिरफ्तारी का कारण बताया गया है तो आरोपी ने बताया कि नहीं। इस पर विवेचक से पूछने पर विवेचना को पसीना आने लगा।

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    इसी दौरान आरोपित ने कोर्ट को बताया कि वह कुछ महत्वपूर्ण बात न्यायालय के संज्ञान में लाना चाहता है। पता नहीं कल मेरी जान बचे या नहीं, क्योंकि रास्ते में मुझे तीन जगह अन्यत्र गाड़ियों में शिफ्ट किया गया। इसलिए मुझे आशंका हो गई कि अब मेरा एनकाउंटर हो सकता है, पुलिस ने मुझे शाहजहांपुर रेलवे प्लेटफॉर्म से गिरफ्तार किया और मुझे यह बताया कि आपकी सुरक्षा के लिए आपको पुलिस मुहैया कराया जा रहा है।

    मैंने कहा कि मुझे कोई सुरक्षा नहीं चाहिए इस पर भी मुझे जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया। मेरा चश्मा फूट गया है, मेरा मोबाइल पुलिस ने ले लिया है। अगर न्यायालय की इजाजत हो तो मुझे कागज और पेन उपलब्ध करा दी जाए तो मैं अपनी बात लिखकर अदालत के संज्ञान में ला सकूं आरोपी को देखने के लिए अधिवक्ताओं की जहां भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी। वहीं पुलिस की भारी मौजूदगी कौतूहल का विषय बन गया था। पुलिस के आला अधिकारी न्यायालय कक्ष के बाहर पल-पल की निगरानी कर रहे थे। भारी पुलिस फोर्स कचहरी चौराहे से लेकर न्यायालय परिसर तक लगा दी गई थी।

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