राप्ती नदी में उफान, भदिला प्रथम गांव जलमग्न, कपरवार पुल क्षतिग्रस्त होने से बढ़ी दुश्वारियां
राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से देवरिया का भदिला प्रथम गांव जलमग्न हो गया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कपरवार पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत क ...और पढ़ें

HighLights
राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से भदिला प्रथम गांव मैरुंड।
कपरवार पुल क्षतिग्रस्त, राहत पहुंचाने में आ रही बाधा।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में पुल निर्माण की घोषणा की थी।
जागरण संवाददाता, देवरिया। राप्ती नदी के बढ़ते जल स्तर से बरहज तहसील क्षेत्र का ग्राम भदिला प्रथम मैरून हो गया है। जिसकी वजह से लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ ही लोगों को जरूरतों के लिए सरकारी नाव उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण मजबूरी में निजी छोटी नाव से नदी पार करनी पड़ रही है, जबकि कपरवार स्थित उग्रसेन उग्रसेन सिंह सेतु क्षतिग्रस्त होने से त्वरित सहायता पहुंचाने में बाधा आने की आशंका जताई जा रही है।
गोरखपुर जनपद के सीमावर्ती क्षेत्र में बसा गांव भदिला प्रथम प्रकृति के निशाने पर रहता है। लगातार बढ़ रहे राप्ती और घाघरा नदी के जल स्तर से मंगलवार की रात में गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी भर गया। जिसकी वजह से ग्रामीणों का रामजानकी मार्ग से सम्पर्क पूरी तरह टूट गया व गांव बाढ़ के पानी की कैद में हो गया है।
बता दें हर वर्ष नदी का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले यह गांव मैरून हो जाता है और पानी उतरने पर सबसे बाद में यहां के लोगों का मुख्य मार्ग से संपर्क जुड़ पता है। एक सप्ताह पूर्व क्षतिग्रस्त हुए उग्रसेन सिंह सेतु से बंद हुए आवागमन ने इस गांव के लोगों की मुसीबत को और बढ़ा दिया है।
मुख्यमंत्री ने की थी पुल निर्माण की घोषणा
राप्ती नदी के उस पार गोरखपुर जनपद की भौगोलिक सीमा में बसा यह गांव लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। वर्षों की जद्दोजहद के बाद 26 जून को ग्राम बरांव में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से भदिला प्रथम में करीब 73 लाख की लागत से पुल बनाने की घोषणा किया, जिसके बाद लोगों में दुश्वारी से निजात की उम्मीद बंधी थी, किंतु बाढ़ ने एक बार फिर उनकी अग्नि परीक्षा लेनी शुरू कर दिया है।
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प्रलयंकारी बाढ़ ने गांव के तीन तरफ बना दी गहरी खाई
ओमप्रकाश यादव , महेंद्र, शुभनाथ, वीरेंद्र साहनी, भोरिक, शिवनाथ, मुन्ना योगेश, मनोज, श्रीराम, सुन्दर, रामसरीख आदि का कहना है कि वर्ष 1998 में आई प्रलयंकारी बाढ़ में राप्ती नदी की एक धारा गांव को घेर कर बहने लगी।
बाढ़ का पानी तो उतर गया किंतु अलग बनी धारा की खाई तीन तरफ मौजूद रह गई। परिवर्तित हो कर बही धारा में हर वर्ष नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पानी भरने से गांव बाढ़ से घिर जाता है। जिसकी वजह से करीब छह माह से अधिक समय तक नाव ही गांव से बाहर जाने का एक मात्र साधन होता है।
तहसीलदार को मौके पर भेज कर स्थिति पता कराई गई है। समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देशित किया गया। हालात पर बराबर नजर रखी जा रही है।
-शशिकांत मणि, एसडीएम बरहज।