बिना कोचिंग NEET में कैसे पाई शौर्य प्रताप ने सफलता? एटा रोडवेज परिचालक के बेटे की सक्सेस स्टोरी
एटा के शौर्य प्रताप ने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में सफलता हासिल की है। ...और पढ़ें

नीट परीक्षा में सफलता पर शौर्य प्रताप को मिष्ठान खिलाकर आशीर्वाद देते माता-पिता। जागरण
HighLights
शौर्य प्रताप ने बिना कोचिंग नीट परीक्षा में सफलता पाई
रोडवेज परिचालक के बेटे ने स्व-अध्ययन से रैंक हासिल की
कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से मिली यह बड़ी उपलब्धि
जागरण संवाददाता, एटा। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) में रोडवेज में संविदा पर कार्यरत परिचालक के पुत्र ने भी सफलता अर्जित की है। बिना किसी कोचिंग के ही उन्होंने पहले प्रयास में सफल रहते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में जाने की राह आसान की है।
शहर के मोहल्ला श्याम नगर निवासी तथा मूल रूप से कस्बा अवागढ़ के समीपवर्ती गांव राजगढ़ के रहने वाले शौर्य प्रताप को कड़ी मेहनत से यह सफलता मिली है। उनके पिता श्याम सुंदर यादव रोडवेज के एटा डिपो में संविदा परिचालक है। वहीं मां नीतू ग्रहणी।
शौर्य प्रताप बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में मेधावी रहे, जिन्होंने प्राइमरी से लेकर माध्यमिक शिक्षा शहर के ही बीपीएस पब्लिक स्कूल से ही प्राप्त की। 10वीं में तथा 12वीं की परीक्षा में वह जिला टॉपर सूची में शामिल रहे। कक्षा नौ से ही उन्होंने चिकित्सक बनकर समाज सेवा के लक्ष्य को तय किया। उसी के अनुरूप मेहनत करते रहे। 12वीं की परीक्षा 2025 में पास की और नीट की तैयारी में लग गए।
बिना कोचिंग स्व अध्ययन से शौर्यप्रताप को मिली पहले प्रयास में सफलता
खास बात यह रही की उन्होंने बड़ी-बड़ी कोचिंग का सहारा ना लेकर किताबें और डिजिटल संसाधनों के आधार पर घर पर ही रहकर तैयारी की। अपने पिता को प्रेरणा स्रोत मानने वाले शोर्य कहते हैं कि उन्होंने हमेशा हौसला बढ़ाया। पहली बार नीट परीक्षा रद्द हुई तो निराशा हुई लेकिन तैयारी को जारी रखा और अब रिजल्ट घोषित हुआ तो सफलता मिल गई।
शौर्य ने पाई 20817वीं रैंक, आईएससी में भी रह चुके हैं टॉपर
शौर्य प्रताप ने जहां 42360 वीं नीट ऑल इंडिया रैंक पाई है वही ओबीसी श्रेणी में 20817 रैंक के साथ बेहतर प्रदर्शन कर दिखाया है। वह दार्शनिक प्लूटो को रोल मॉडल मानते हैं वहीं उनकी खासियत यह रही कि विज्ञान के छात्र होने के बावजूद भी उनकी इतिहास पढ़ने में भी खासी रुचि है। रोज 8 घंटे अध्ययन किया तथा इंटरनेट मीडिया से दूर रहे।
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शौर्य का कहना है कि बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता सिर्फ कोचिंग और बड़े संसाधनों से ही प्राप्त नहीं की जा सकती। जरूरी है दृढ़ इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास के साथ कड़ी मेहनत जरुर सफलता दिलाती है।
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