सैफई विश्वविद्यालय दुष्कर्म कांड: कानपुर से आई एक्सपर्ट टीम, आज होगी निर्णायक बैठक
सैफई विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग में मानसिक मंदित महिला से दुष्कर्म मामले में जांच तेज हो गई है। कानपुर की विशेषज्ञ टीम की मदद से पीड़िता के धार ...और पढ़ें
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HighLights
पीड़िता के धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए।
कानपुर की विशेषज्ञ टीम ने बयान दर्ज कराने में मदद की।
आज विश्वविद्यालय कार्यपरिषद में कार्रवाई पर निर्णय होगा।
संवाद सहयोगी, सैफई(इटावा)। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के मानसिक रोग विभाग में भर्ती मानसिक मंदित महिला से दुष्कर्म प्रकरण में अब जांच और न्यायिक प्रक्रिया अहम मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस ने कानपुर से आई विशेषज्ञ टीम की मदद से पीड़िता के न्यायालय में धारा 164 के तहत बयान दर्ज करा दिए हैं। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यपरिषद की बैठक आज शनिवार को आयोजित की जाएगी, जिसमें जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
प्रकरण की विवेचना कर रही पुलिस टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता के बयान दर्ज कराना थी, क्योंकि वह बोलने, सुनने और सामान्य रूप से समझने में अक्षम है। ऐसे में कानपुर से दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम बुलाई गई, जिसमें एक महिला और एक पुरुष विशेषज्ञ शामिल रहे। इन विशेषज्ञों ने पीड़िता के हाव-भाव, संकेत और मानसिक स्थिति को समझते हुए न्यायालय में उसके बयान दर्ज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सूत्रों के अनुसार न्यायालय में धारा 164 के तहत दर्ज किए गए बयान इस पूरे मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया के तहत लिया गया पीड़िता का आधिकारिक पक्ष होता है, जिसे अदालत में मजबूत साक्ष्य के रूप में माना जाता है।
पुलिस पहले ही पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज चुकी है और अब बयान दर्ज होने के बाद जांच और भी सुदृढ़ हो गई है। विवेचना से जुड़े अधिकारी पूरे घटनाक्रम को वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर मजबूत करने में जुटे हैं, ताकि अदालत में मामला प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
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उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आज 28 मार्च को कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई है, जिसमें 9 सदस्यीय जांच समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। इसी बैठक में यह तय होगा कि इस पूरे प्रकरण में किस स्तर पर लापरवाही हुई और किन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि मानसिक रोग विभाग में 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को भर्ती कराया गया था, जो बोलने, सुनने और समझने में अक्षम है और लंबे समय से उपचाराधीन थी। 17 मार्च 2026 को रूटीन जांच के दौरान उसके करीब पांच माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार बाल्मीकि निवासी लखना, थाना बकेवर, जनपद इटावा को आरोपी बनाया गया, जिसे पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष को हटाने के साथ ही संबंधित वार्ड में तैनात एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया था और पूरे मामले की जांच के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित कर दी थी।
अब इस पूरे प्रकरण में बड़े फैसलों पर सबकी नजरें टिकी हैं।