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    महिला के पित्ताशय से निकाली 14 सेंटीमीटर लंबी और 200 ग्राम वजन की पथरी, लैप्रोस्कोपिक तकनीक से किया ऑपरेशन

    Updated: Sat, 30 May 2026 07:50 PM (GMT+05:30)

    उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई में गैस्ट्रो सर्जरी विभाग ने 62 वर्षीय महिला के पित्ताशय से 14 सेंटीमीटर लंबी और 200 ग्राम ...और पढ़ें

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    संवाद सहयोगी, सैफई। पेट दर्द, उल्टी और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रही 62 वर्षीय महिला के पित्ताशय में मिली 14 सेंटीमीटर लंबी और लगभग 200 ग्राम वजनी पथरी को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकालकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

    चिकित्सकों के अनुसार इतने बड़े आकार की पथरी को दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) विधि से निकालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। संस्थान का दावा है कि इस विधि से विश्व के सबसे बड़ी पित्ताशय पथरी का ऑपरेशन किया गया है।

    गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के सर्जन डा. कन्हैया लाल चौधरी एवं उनकी टीम के पास पहुंची महिला मरीज लंबे समय से पेट दर्द, उल्टी और पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान थी। जांच के दौरान उसके पित्ताशय में असामान्य रूप से बड़े आकार की पथरी पाई गई। सामान्यतः ऐसे मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर विशेषज्ञों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का निर्णय लिया।

    सर्जिकल टीम के लिए चुनौती बना रहा पथरी का आकार 

    ऑपरेशन के दौरान पथरी का आकार और उसकी स्थिति सर्जिकल टीम के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। इसके बावजूद चिकित्सकों ने अत्यधिक सावधानी और कुशलता के साथ पित्ताशय सहित पथरी को सफलतापूर्वक निकाल लिया। सर्जरी के बाद मरीज की हालत सामान्य है और उसकी रिकवरी संतोषजनक बताई जा रही है।

    डा. कन्हैया लाल चौधरी ने बताया कि पथरी का आकार सामान्य मामलों की तुलना में कई गुना बड़ा था। ऐसे मामलों में सर्जरी के दौरान विशेष अनुभव और अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई और मरीज को अपेक्षित लाभ मिला है।

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    उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध

    विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डा. अजय सिंह ने सर्जरी में शामिल चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीकों की मदद से लगातार जटिल सर्जिकल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इससे क्षेत्र के मरीजों को महानगरों का रुख किए बिना उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

    लैप्रोस्कोपिक सर्जरी आधुनिक न्यूनतम चीरा तकनीक है, जिसमें छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से कैमरे और विशेष उपकरणों की सहायता से ऑपरेशन किया जाता है। इस तकनीक से मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और अपेक्षाकृत कम समय में स्वस्थ होने का लाभ मिलता है।