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फर्रुखाबाद में गंगा की तेज धार की आवाज ने छीनी ग्रामीणों की नींद, जागकर रात काटने को मजबूर लोग

Published: Mon, 10 Aug 2026 05:30 AM (IST)

फर्रुखाबाद के दिलीप की मड़ैया गांव में गंगा की तेज धार से ग्रामीण रातभर जागने को मजबूर हैं। कटान के ...और पढ़ें

बाढ़ के चलते जागकर रात काटने को मजबूर हैं ग्रामीण।

बाढ़ के चलते जागकर रात काटने को मजबूर हैं ग्रामीण।

HighLights

  1. गंगा की तेज धार से ग्रामीण रातभर जागने को मजबूर।

  2. कटान के डर से ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपने मकान।

  3. बच्चों और पशुओं के लिए भोजन-चारा की भारी कमी।

जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। रात में गंगा की तेज धार ने गांव दिलीप की मड़ैया के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण जागकर रात काटने को मजबूर हैं। टूटे-फूटे बर्तनों में रुखा-सूखा भोजन कर रहे बच्चों व महिलाओं व पानी में भूखे बैठे पशुओं को देख हर किसी का दिल पसीज रहा है। अपने हाथों से आशियाना तोड़ चुके ग्रामीणों का दर्द छलक पड़ा।

बोले कि बड़ी मेहनत से एक-एक रुपया जोड़कर मकान बनाया था। बाढ़ ने एक पल में सब बर्बाद कर दिया। गंगा की तेज धार के कारण रात जागकर काटना पड़ रही है।

दिलीप की मड़ैया में रविवार को झोपड़ी में कुछ ग्रामीण व बच्चे बैठे थे। कुछ दूर पर ही गंगा की धार बह रही थी। कैमरे से गंगा की तेज धार कैद करना शुरू किया तो संतोषी देवी बोलीं कि अभी तो कुछ नहीं, रात में गंगा की धार की कल-कल करती तेज आवाजों से मन सिहर उठता है। दो दिन से कटान तेज होने से रात जागकर काटी हैं।

डर लगा रहा कि कहीं रात में ही कटान से मकान का पिछला हिस्सा न गिर पड़े। आगे का हिस्सा तो दो दिन पहले गिर चुका है। पशुओं के लिए चारा व भूसा नहीं है। दो-तीन दिन पहले राशन किट मिली थी, जो खत्म होने को आ गई।

नाते-रिश्तेदार बुलाते हैं, लेकिन अपनी देहरी छोड़ने की हिम्मत नहीं होती है। लेखराज बोले कि बाढ़ तो हर वर्ष आती है, लेकिन इस बार जैसी बाढ़ नहीं देखी। रामू ने कहा कि मेहनत-मजदूरी कर एक-एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था। मजबूरी में खुद ही उसे तोड़ना पड़ा।

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