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    फर्रुखाबाद में किसान बोले- आलू का लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा, कोल्ड स्टोरेड मालिकों की बढ़ी चिंता

    Updated: Sat, 20 Dec 2025 05:09 PM (GMT+05:30)

    फर्रुखाबाद मंडी में आलू का भाव नहीं बढ़ने से किसान परेशान हैं, जिससे कोल्ड स्टोरेज मालिकों को राहत की उम्मीद है। मंडी में नया आलू 581 से 701 रुपये क्व ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। मंडी में नये आलू का भाव नहीं बढ़ पा रहा है। इससे किसान परेशान हैं। उनका लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा है। जिससे कोल्ड स्टोरेज मालिकाें को उम्मीद जगी है कि इस बार कोल्ड स्टोरेज खुलते ही आलू भंडारण को मारामारी मचेगी।

    उन्हें भंडारण के लिए आलू नहीं खरीदना पड़ेगा। शुक्रवार को मंडी में नये आलू का भाव 581 से 701 रुपये क्विंटल तक रहा। वहीं कोल्ड स्टोरेज में पुराना आलू 250 रुपये क्विंंटल के भाव से बिक रहा है।

    सातनपुर मंडी में आलू की आमद बढ़ गई है। शुक्रवार को करीब 150 ट्रक आलू बिक्री के लिए आया। यह आलू 581 रुपये से 701 रुपये क्विंटल के भाव से बिका। किसानों का कहना है कि इस भाव में लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा।

    यदि भाव नहीं बढ़ा तो इस बार कोल्ड स्टोरेज में भंडारण को मारामारी मचना तय है। वर्ष 2024 में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नया आलू 1700 से 1800 रुपये क्विंटल के भाव से बिक रहा था। जिससे बड़ी संख्या में किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में भंडारण के बजाय बिक्री में रुचि दिखाई।

    शीतगृह खाली रहने पर कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने स्वयं पंजाब आदि से आलू खरीदकर भंडारित किया था। जब कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू निकाल कर बेचने की नौबत आई तो भाव गिर गया, जिससे नुकसान हो रहा है। इस बार भाव में मंदी के चलते अभी से भंडारण को शीतगृहों में संपर्क करने लगे हैं।

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    जिससे कोल्ड स्टोरेज मालिक संतुष्ट हैं। आलू व्यवसायी सुधीर शुक्ला ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को कोल्ड स्टोरेज में पुखराज आलू 250 रुपये क्विंटल के भाव से खरीदा है। प्रभारी मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित ने बताया कि मंडी में आलू की आवक बढ़ी है। किसानों को इस बार नुकसान हो रहा है। बाहर की मंडियों से अपेक्षा के अनुसार मांग नहीं आ रही है।

    ‘आलू की पैदावार में प्रतिबीघा 10 से 11 हजार रुपये की लागत आती है। अभी अगैती फसल में एक बीघा में 14 से 15 पैकेट आलू ही निकल रहा है। भाव कम होने के कारण नुकसान अधिक हो रहा है। किसानों को राहत तभी मिल सकती है जब सरकार हस्तक्षेप करे।’
    - अमित पाल, किसान।

    ‘आलू का भाव नुकसान दे रहा है। इस कारण वह लोग अब गेहूं की फसल बोने की तैयारी कर रहे हैं। अभी जो भाव है उसमें सिंचाई का खर्च भी नहीं मिल रहा है। आलू में चार बार पानी लग चुका है। भाव बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास होने चाहिए।’
    - गिरीश सिंह, किसान।