फिरोजाबाद में पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 6 साल के बच्चे की हत्या करने वाले बाल अपचारी को उम्रकैद
फिरोजाबाद में 10 साल पहले 6 वर्षीय बच्चे की हत्या के दोषी बाल अपचारी को विशेष न्यायाधीश बाल न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

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जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। 10 वर्ष पूर्व छह वर्ष के बच्चे की गला दबाकर हत्या करने के मामले में विशेष न्यायाधीश बाल न्यायालय (पाक्सो कोर्ट) ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला दिया।
हत्या के दोषी बाल अपचारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। निर्भया कांड के बाद लागू हुए संशोधित किशोर न्याय अधिनियम (पाक्सो कोर्ट) 2015 में दी गई व्यवस्था के अनुसार न्यायालय ने उसे वयस्क मानते हुए सुनवाई की थी।
घटना रसूलपुर क्षेत्र में 19 मई 2016 को हुई थी। पिता ने एक लाख रुपये की फिरौती के लिए अपहरण के बाद हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन न्यायालय में फिरौती और अपहरण की बात साबित नहीं हो सकी।
10 साल पहले की है घटना
रसूलपुर क्षेत्र में हुई इस सनसनीखेज वारदात ने सभी को हैरान कर दिया था। सुबह 10 बजे घर के बाहर गली में खेल रहा नरेंद्र कुमार का बेटा वीर प्रताप अचानक लापता हो गया। शाम तक तलाश करने के बाद भी कुछ पता नहीं चला तो नरेंद्र कुमार और कुछ पड़ोसियों ने हर घर की तलाशी लेना शुरू किया।
उसी दौरान रात 11 बजे मोहल्ले में बच्चे का शव बाल अपचारी के घर में टिनशेड पड़े अर्द्धनिर्मित घर में मिला था। वहां भीड़ जुटना शुरू हुई तभी बच्चे की मां गिरजा देवी एक पत्र लेकर वहां पहुंचीं, जो उन्हें अपने घर में मिला था।
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उसमें लिखा था कि बेटे को जिंदा चाहते हो तो एक लाख रुपये मुरारी लाल के ईंट भट्ठे पर बने कमरे में रखवा देना। कोई होशियारी दिखाने की कोशिश मत करना। लोगों ने किशोर को मौके से पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था।
एक लाख रुपये मांगी थी फिरौती
जांच के बाद विवेचक ने 24 दिन में उसके विरुद्ध फिरौती के लिए अपहरण और हत्या की धारा में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई पहले किशोर न्याय बोर्ड में हुई, लेकिन हत्या जैसी जघन्य वारदात के समय बाल अपचारी की आयु 17 वर्ष पांच माह होने के बाद बोर्ड ने मामला 31 जुलाई 2019 को विशेष न्यायाधीश (पाक्सो अधिनियम) एवं बाल न्यायालय में भेज दिया।
अभियोजन की तरफ से एडीजीसी अर्वेश शुक्ला और वरिष्ठ अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने पक्ष रखा। बुधवार को बाल न्यायालय मुमताज अली की कोर्ट ने बाल अपचारी को हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई। वहीं फिरौती और अपहरण साबित न हो पाने पर दोष मुक्त कर दिया।
जमानत पर आने के बाद कर ली थी शादी
बाल अपचारी ने जमानत पर रिहा होने के बाद शादी कर ली थी। उसके बच्चे भी हैं। सजा कम कराने के लिए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि बाल अपचारी का यह पहला अपराध है, वह घर का इकलौता कमाने वाला है। उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं, इसलिए कम से कम सजा दी जाए।
वहीं वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि बाल अपचारी ने अपने घर में बच्चे की नृशंस हत्या की है। इसलिए उसे अधिक से अधिक दंड दिया जाए।
सजा दिलाने में नजीर बना मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आजीवन कारावास की सजा को कम कराने के लिए यह तर्क भी दिया कि इस तरह के मामलों में आजीवन कारावास की सजा नहीं हो सकती।
इसके जवाब में बचाव पक्ष ने मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा छह जनवरी 2023 को राजकुमार बनाम राज्य में दिए उस निर्णय का हवाला दिया। जिसमें हत्या और पॉक्सो एक्ट के मामले में बाल अपचारी को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।