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    फिरोजाबाद में तहसीलदार ने DM के खिलाफ मोर्चा खोला, बोलीं दवाब बनाकर लिया iPhone; अफसरों की रार खुलकर आई सामने

    By Puneet Kumar Rawat Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Fri, 17 Apr 2026 07:18 PM (IST)

    फिरोजाबाद में टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा ने डीएम रमेश रंजन और उनके ओएसडी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि डीएम ने दबाव ब ...और पढ़ें

    फिरोजाबाद में तैनात तहसीलदार राखी शर्मा और डीएम रमेश रंजन।

    फिरोजाबाद में तैनात तहसीलदार राखी शर्मा और डीएम रमेश रंजन।

    जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। सुहागनगरी के प्रशासनिक महकमे में बड़ा धमाका हुआ है। टूंडला में तैनात रहीं तहसीलदार ने डीएम के विरुद्ध माेर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को उन्होंने मीडिया के सामने डीएम और उनके ओएसडी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डीएम दबाव बनाकर नैतिक, अनैतिक मांग करते हैं।

    वह डीएम को 1.75 लाख रुपये का आई फोन दे चुकी हैं। इसके बाद भी उनका आठ महीने तक वेतन रोके रखा गया। जिससे उन्हें फरवरी में उच्च न्यायालय जाना पड़ा था। मूलरूप से आगरा के बल्केश्वर निवासी तहसीलदार राखी शर्मा डेढ़ वर्ष से टूंडला तहसील में तैनात हैं। उनके और डीएम के बीच कई महीनों से तनातनी चल रही है।

    इस वर्ष फरवरी में ये मामला पहली बार तब खुलकर सामने आया जब राखी शर्मा ने आठ माह से वेतन न मिलने पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएम ने उन्हें प्रताड़ित करने के लिए उनका वेतन रोक रखा है।

    हालांकि होली से पूर्व उनका वेतन जारी हो गया था, लेकिन मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तहसीलदार के स्थानान्तरण की चर्चा राजस्व विभाग में थी। गुरुवार शाम तीन तहसीलदारों के स्थानान्तरण हुए। इनमें राखी शर्मा भी शामिल हैं। उन्हें इसी पद पर शिकोहाबाद भेजा गया था।

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    इसके कुछ घंटे बाद राखी शर्मा ने मीडिया के सामने डीएम रमेश रंजन और उनके ओएसडी शीलेंद्र शर्मा का नाम लेते हुए कहा कि इनके द्वारा सभी राजस्व अधिकारियों को प्रताड़ित किया जाता है। ओएसडी के साथ ही कलक्ट्रेट के कई बाबू भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और सर (डीएम) की इसमें हिस्सेदारी है।

    वेतन न मिलने पर जब वह उच्च न्यायालय गईं तो कार्रवाई से बचने को रात में ही कोषागार खुलवाकर उनका वेतन जारी किया गया। डीएम ने अपने कार्यालय बुलाकर याचिका को वापस लेने का दबाव भी बनाया। तहसीलदार का कहना है कि डीएम दबाव बनाकर नैतिक, अनैतिक मांग करते हैं। कई बातें ऐसी हैं जो वह सार्वजनिक रूप से नहीं कह सकतीं।

    दबाव बनाने के लिए उनके न्यायालय के आदेशों की भी जांच कराई जाती है। इन जांचों को मैनेज करने के लिए वह ओएसडीए के माध्यम से डीएम को पिछले वर्ष चार नवंबर को 1.75 लाख रुपये का आइ फोन दे चुकी हैं। इसके साक्ष्य उनके पास हैं। अब ओएसडी द्वारा आई वाॅच की मांग की जा रही है।

    इधर कलक्ट्रेट कर्मचारी तहसीलदार के विरुद्ध लामबंद हो गए हैं। उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रीयल कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद और मंडलायुक्त आगरा को पत्र भेजकर तहसीलदार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।