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    गाजियाबाद रजिस्ट्री सिस्टम में 3700 करोड़ का मिला संदिग्ध लेनदेन, पैन कार्ड धोखाधड़ी उजागर

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 07:55 PM (IST)

    आयकर विभाग ने गाजियाबाद के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में ₹3700 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा किया है। जांच में संपत्ति रजिस्ट्रियों में बड़ी ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर।

    सांकेतिक तस्वीर।

    HighLights

    1. गाजियाबाद रजिस्ट्री में ₹3700 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन

    2. अमान्य पैन कार्ड से टैक्स चोरी का खुलासा

    3. आयकर विभाग द्वारा गहन जांच और कार्रवाई जारी

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। कानपुर और नोएडा के बाद अब गाजियाबाद रजिस्ट्री सिस्टम में बड़े पैमाने पर संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। आयकर विभाग की टीम ने सब रजिस्ट्रार-1 कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की। शुरुआती जांच में करीब 3700 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है।

    जांच में संपत्ति रजिस्ट्रियों के रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में अमान्य, अधूरे व दोषपूर्ण पैन कार्ड के जरिये टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। आयकर विभाग महानिदेशालय (खुफिया एवं आपराधिक जांच) कानपुर के निर्देशन में सब रजिस्ट्रार-1 कार्यालय गाजियाबाद में सर्वे की कार्रवाई की गई। बताते हैं कि जांच में बीते करीब पांच वर्षों में अमान्य और डुप्लीकेट पैन कार्ड के माध्यम से बड़ी संख्या में बैनामों का पंजीकरण किया जाना मिला।

    शुरुआती जांच में अभी तक करीब 3700 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन और टैक्स चोरी की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में विस्तृत जांच के साथ ही संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। सर्वे टीम में आयकर विभाग के संयुक्त निदेशक विजय सिंह और आयकर अधिकारी सुधीर कुमार ने टीम बताई जाती है।

    खंगाला रहे डिजिटल डाटा और एसएफटी

    आयकर टीम डिजिटल डाटा, एसएफटी (रजिस्ट्रियों के दस्तावेज व स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) रिकॉर्ड को खंगाल रही है। कई मामलों में संपत्ति की रजिस्ट्रियों में पैन या तो गलत दर्ज हैं या दिए ही नहीं गए हैं, जबकि बड़े लेन-देन में पैन अनिवार्य है।

    खबरें और भी

    फार्म-61 व 61ए की रिपोर्टिंग में भी बड़ा अंतर मिला है। सब रजिस्ट्रार कार्यालय-1 में कार्रवाई के बाद अब अन्य सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। ताकि संपत्ति लेन-देन से जुड़े डाटा की स्थिति सामने आ सके।

    कई बार जारी किए जा चुके थे नोटिस

    आयकर विभाग ने रजिस्ट्री कार्यालय को पहले भी कई बार नोटिस जारी कर भेजकर जानकारी को सही करने और दोषपूर्ण पैन से जुड़ी प्रविष्टियों को संशोधित करने का निर्देश दिया था, लेकिन संबंधित कार्यालय की ओर से इस संबंध में कोई गंभीरता नहीं दिखाई और न ही अपेक्षित सुधार किए गए।

    कानपुर और नोएडा में मिल चुकी अनियमितताएं

    कानपुर व कानपुर देहात के रजिस्ट्री कार्यालयों में भी आयकर विभाग को करोड़ों की अनियमितताएं मिली थीं, जिसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी रजिस्ट्री रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई है।

    गाजियाबाद में यह मामला उसी जांच का नतीजा है। अब चल रही गहन जांच में गड़बड़ी पर संबंधित अधिकारियों और दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंटों पर आयकर अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

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    30 लाख से अधिक के बैनामे की सूचना साल के आखिर में जुलाई तक अपलोड करना होता है। बैनामे की सूचना सीए के माध्यम से आयकर विभाग की साइट पर अपलोड की जाती है। असली और फर्जी वैरीफाई करने का सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कोई सिस्टम नहीं था। अभी चार महीनें ही पैन वैरीफिकेशन की सुविधा मिली है। किसी ने इससे पहले फर्जी पैन लगाया है यह सब रजिस्ट्रार कैसे बता सकता है।


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    पुष्पेंद्र यादव, एआइजी स्टांप