'सुपर बग' को जन्म दे रहा एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस, गाजियाबाद में डॉक्टर ने एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर दी जानकारी
गाजियाबाद में दैनिक जागरण और आईएमए ने सिल्वर साइन स्कूल में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) पर जागरूकता कार्यक्रम किया। डॉ. सारिका ...और पढ़ें
-1771293157727_m.webp)
सिल्वर साइन स्कूल महेंद्रा एन्क्लेव में एएमआर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) वर्तमान में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा है, जो ''सुपर बग'' बैक्टीरिया को जन्म दे रहा है। ये ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक्स दवाएं बेअसर हो जाती हैं।
ये जानकारी दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की संयुक्त मुहिम एएमआर पर प्रहार के अंतर्गत सिल्वर साइन स्कूल महेंद्रा एन्क्लेव में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में आइएमए की कोषाध्यक्ष डॉ. सारिका जैन ने विद्यार्थी एवं शिक्षकों को दी।
कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर ने विद्यार्थियों को एंटीबायोटिक दवाओं को लेने का सही तरीका और गलत तरीके से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल के दुष्प्रभाव समझाए। विद्यार्थियों ने भी एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर डाक्टर के सवालों के जवाब दिए।
डा. सारिका जैन ने एंटीबायोटिक दवाएं क्या हैं, दवाओं का आविष्कार आदि की जानकारी देते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पहले संक्रमण की सबसे ज्यादा समस्या सर्जरी को लेकर होती थी। सफलता पूर्वक सर्जरी होने के बाद भी संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती थी। एंटीबायोटिक दवाओं का सर्जरी में बड़ा रोल देखा गया।
वर्तमान में वायरल एवं बैक्टीरियल आदि के संक्रमण के इलाज के लिए चिकित्सकों द्वारा एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। इन एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल की वजह से वायरस स्वयं प्रतिरोधक क्षमता बना लेते हैं। ऐसे में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की वजह से सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करती हैं। यह एक गंभीर मुद्दा है। जिसके प्रति सभी को जागरूक होने की जरूरत है। एएमआर के विभिन्न कारण हैं।
लोग पुराने पर्चे पर या बिना डाक्टर की सलाह के ही मेडिकल स्टोर से दवा ले लेते हैं। कई बार डाक्टर ने एंटीबायोटिक दवाओं की जितनी खुराक बताईं उसको पूरी नहीं करते। एक या दो खुराक में ही आराम होने पर दवाओं को बीच में छोड़ देते हैं। जो काफी ज्यादा हानिकारक है। योग्य चिकित्सक की सलाह पर सही तरीके से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा जरूरत के दवाओं का इस्तेमाल न करें। सर्दी जुकाम जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एंटीबायोटिक दवाएं न लें।
जो एंटीबायोटिक दवाएं आप ले रहे हैं वह कहीं नहीं जा रही हैं वह मल मूत्र के रूप में बाहर आकर पर्यावरण में मौजूद रहते हैं। ऐसे में कीटाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जा रही है। एएमआर सुपर बग को जन्म दे रहा है। जिस पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर होती है।
डॉ. सारिका जैन ने कहा कि नानवेजीटेरियन लोगों के लिए बाजार से खरीदा हुआ मीट बड़ा खतरा है। मुर्गियों को एंटीबायोटिक दवाएं लगा हुआ दाना खिलाया जाता है। इसके बाद मीट जल्दी खराब न हो इसके लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करते हैं। नान वेज ही नहीं वेज खाना बाहर खाने से बचें। स्वच्छता का ध्यान रखें। इसके अलावा उन्होंने विद्यार्थियों को एंटीबायोटिक दवाओं का सही इस्तेमाल करने के लिए शपथ भी दिलाई।
छात्रों की राय
एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस को लेकर डाक्टर से काफी जानकारी मिली। इसके प्रति सभी को जागरूक होना जरूरी है। - दिया चौधरी, छात्रा, कक्षा नौवीं
एएमआर के प्रति सभी को जागरूक होना चाहिए। कार्यक्रम में काफी अच्छा रहा। काफी कुछ नया समझने को मिला। - आरोही गर्ग, छात्रा, कक्षा नौवीं
इस जागरूकता कार्यक्रम को मुझसे कहा जाए तो मैं 9.5 प्रतिशत नंबर दूंगा। इतनी नई जानकारी मिलीं कि लगा कि कार्यक्रम और लंबा चलना चाहिए था। - ध्रुव चौधरी, छात्र, कक्षा 11वीं
कार्यक्रम काफी अच्छा था। डॉक्टर से कई नई जानकारी मिलीं। सुपर बग के बारे में पहले बार जानने को मिला। - जुनैद हुसैन, छात्र, 11वीं
प्रधानाचार्य का अभिमत
एएमआर आज के समय में एक गंभीर मुद्दा है। एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर दैनिक जागरण द्वारा मुहिम चलाकर लोगों को जागरूक करना सराहनीय है। - सुनील त्यागी, प्रधानाचार्य, सिल्वर साइन स्कूल महेंद्रा एन्क्लेव
यह भी पढ़ें- 'एंटीबायोटिक दवाओं का गलत तरीके से निस्तारण बढ़ा सकता है एएमआर का खतरा', गाजियाबाद में डॉक्टर ने दी चेतावनी
