गाजियाबाद पुलिस बनकर बुजुर्ग को 7 दिन किया डिजिटल अरेस्ट, आतंकी गतिविधियों का डर दिखाकर ठगे 10 लाख
गाजियाबाद में साइबर ठगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर एक बुजुर्ग को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर ...और पढ़ें

वैशाली निवासी एक बुजुर्ग से गाजियाबाद का ही पुलिसकर्मी बनकर ठगी की गई है।
HighLights
गाजियाबाद में पुलिस बनकर बुजुर्ग से 10 लाख ठगे।
आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर फंसाया।
दूसरे मामले में 5.27 लाख की यूपीआई धोखाधड़ी।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। साइबर अपराधी अभी तक दिल्ली या मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बनकर या सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों के साथ ठगी करते थे। वैशाली निवासी एक बुजुर्ग से गाजियाबाद का ही पुलिसकर्मी बनकर ठगी की गई है।
ठगों ने कमिश्नरेट का पुलिसकर्मी बता एक बुजुर्ग को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। पीड़ित से आरोपितों ने जांच के नाम पर 10 लाख रुपये खातों में ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद जब उनसे जमानत के नाम पर पांच लाख रुपये और मांगे तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
वैशाली निवासी पूरन सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह 77 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। दस अगस्त को दोपहर करीब तीन बजे उनके पास फोन आया। काॅल करने वाले ने खुद को गाजियाबाद पुलिस हेडक्वार्टर से बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हो रहा है। उनके आधार से एक सिम जारी हुआ है और उसका इस्तेमाल किसी आतंकी ने किया है। इसके बाद उन्हें पुलिस ऑफिस आने के लिए कहा गया।
पीड़ित ने पहुंचने में असमर्थता जताई। इसलिए उनका फर्जी एटीएस के एक अधिकारी से वीडियो काल पर संपर्क कराया गया। काल पर उन्हें बताया गया कि उनके नाम का वारंट निकल चुका है और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। आरोपितों ने आनलाइन जांच के नाम पर उनसे गोपनीयता बनाए रखने को कहा। आरोप है कि ठगों ने एक गोपनीय समझौता वाट्सऐप के माध्यम से भेजा। पीड़ित ने उस पर हस्तलिखित सहमति देकर वापस भेज दिया।
इसके बाद गिरफ्तारी वारंट, समन जब्ती आदेश और बैंकिंग अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज भी वाट्सऐप पर भेजे गए। पीड़ित ने ठगों के डर से घबराकर अपने खाते की जानकारी देकर 10 से 17 अगस्त के बीच बैंक से आरटीजीएस के जरिए दस लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। जब आरोपितों ने जमानत के नाम पर पांच लाख रुपये और मांगे तब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का पता चला। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर लिया गया हैं। पुलिस जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए हैं उनकी जानकारी कर रही है।
मोबाइल पर एसएमएस भेज, खाते से ठगों ने निकाले 5.27 लाख रुपये
दूसरी घटना में मोबाइल पर अचानक बड़ी संख्या में एसएमएस आने के बाद एक व्यक्ति के बैंक खाते से 5.27 लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मोदीनगर निवासी भूपेंद्र शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 14 अगस्त को उनके मोबाइल पर अचानक बड़ी संख्या में एसएमएस आने शुरू हो गए।
बड़ी संख्या में संदेश आने के कारण बैंकिंग लेनदेन से संबंधित कुछ जरूरी मैसेज उनकी नजर में नहीं आ सके। पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान बिना उनकी जानकारी और सहमति के बैंक खाते में यूपीआइ सक्रिय कर दिया गया। इसके बाद 18 और 19 अगस्त को उनके खाते से अलग-अलग रकम के कई अवैध लेनदेन किए गए। कुल 5.27 लाख रुपये की रकम उनके खाते से धोखाधड़ी कर निकाल ली गई।
"साइबर ठगी के दोनों मामलों में बैंक खातों की जानकारी ली जा रही है। जिन नंबरों से मैसेज आए और काल आए उनकी डिटेल निकलवाई जा रही है। शीघ्र आरोपितों का पता लगाकर गिरफ्तारी की जाएगी।"
-अमित सक्सेना, एसीपी क्राइम।
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